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शहीदों को श्रद्धांजलि देने में भी दिखी वर्चस्व की होड़

Thu, 03 Oct 2013 05:20 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 03 Oct 2013 05:20 PM IST
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Race for supremacy in paying tribute to martyrs

राज्य आंदोलन की लड़ाई में कभी साथ चलने का दावा करने वाले आंदोलनकारी नेता शहीदों को याद करते वक्त भी साथ नहीं आ सके।

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बुधवार को रामपुर तिराहा कांड की 19वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा पेश आया। कचहरी स्थित शहीद स्मारक परिसर पर एक-दो नहीं करीब आधा दर्जन अलग-अलग संगठनों के बैनर लगे नजर आए। हर बैनर तले आंदोलनकारी अलग गुट में बंटे हुए थे।

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खास बात यह रही कि शहीदों को अलग-अलग श्रद्धांजलि देने के बाद सभी संगठनों के पदाधिकारी खुद को दूसरे से बड़ा दिखाने के लिए पूरा जोर लगाते रहे। उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच, उत्तराखंड राज्य निर्माण चिह्नित आंदोलनकारी, उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मंच, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद आदि का कार्यक्रम अलग-अलग था।
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विनोद चमोली और रवींद्र जुगरान भी अलग-अलग धड़ों में
सबके कार्यक्रम साथ शुरू हुए और साथ ही खत्म। लेकिन इस दौरान भाषणबाजी में वक्ताओं के बीच कंपीटीशन नजर आया। इससे यह भी साफ हो गया कि श्रेय लेने की होड़ में आंदोलनकारी कहीं न कहीं मूल मकसद से भटक रहे हैं।

दूसरी ओर, एक ही जगह मौजूद होने के बावजूद मेयर विनोद चमोली और रवींद्र जुगरान भी अलग-अलग धड़ों में बने रहे।

सबका मकसद एक ही था, लेकिन संगठन अलग-अलग बैठे थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आगे होने वाले कार्यक्रमों में सभी को एक मंच में लाने के प्रयास किए जाएंगे।
- रवींद्र जुगरान, पूर्व अध्यक्ष आंदोलनकारी सम्मान परिषद

हम हमेशा इन लोगों के साथ चले हैं, लेकिन इनकी विचारधारा से हम सहमत नहीं हैं। हमारा पहले ही कार्यक्रम तय हो चुका था, इसलिए हम शहीद स्थल पर बैठे थे।
- लक्ष्मण सिंह भंडारी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण चिह्नित आंदोलनकारी मंच

आज आंदोलनकारी राजनीतिक पार्टियों के साथ चल रहे हैं। जब तक आंदोलनकारी इन पार्टियों से अलग होकर नहीं चलेंगे, तब तक सभी में एकता होना मुश्किल है।
- नंदा बल्लभ पांडे, केंद्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मंच

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