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Dehradun News: कालाखेड़ा चरस बरामदगी पर उठे सवाल, अब सीबीआई करेगी पूरे मामले की जांच
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देहरादून। ऊधमसिंह नगर के केलाखेड़ा क्षेत्र में वर्ष 2020 में ढाबा संचालक अनिल शर्मा से 97.70 ग्राम चरस बरामद होने के मामले ने छह साल बाद फिर नया मोड़ लिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर छह साल पुराने मामले को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी है। अब न केवल चरस की कथित बरामदगी की सच्चाई जांची जाएगी, बल्कि पुलिस पर लगे झूठा फंसाने, मारपीट और साक्ष्य मिटाने के आरोपों की भी पड़ताल होगी।
28 जुलाई 2020 को केलाखेड़ा पुलिस की टीम पंडित ढाबे के पास पहुंची थी। पुलिस का दावा था कि एक व्यक्ति को ट्रक के पीछे छिपा देखकर पकड़ा गया और उसके कब्जे से 97.70 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके आधार पर अनिल शर्मा के खिलाफ मादक पदार्थ अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
वहीं अनिल शर्मा की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मी पहले ढाबे पर पहुंचे, कर्मचारी विक्रम सिंह के साथ मारपीट की और उसका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर पुलिस चौकी ले जाया गया। आरोप था कि मौके पर कोई चरस बरामद नहीं हुई और बाद में पुलिस चौकी में बरामदगी दिखाई गई।
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मामले में सबसे गंभीर आरोप सीसीटीवी फुटेज मिटाने का है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में प्रथम दृष्टया अनिल शर्मा को झूठे मामले में फंसाने और साक्ष्य तैयार किए जाने की बात सामने आई थी। सीसीटीवी फुटेज मिटाने की कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई थी।
हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2026 को कहा कि पुलिस के आचरण से निष्पक्ष जांच करने की उसकी क्षमता को लेकर उचित संदेह पैदा होता है। अदालत ने चरस बरामदगी की प्राथमिकी और पुलिस की कथित ज्यादती व झूठे फंसाने से जुड़े मामले, दोनों की जांच सीबीआई को सौंप दी।
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क्या हुआ था उस दिन
28 जुलाई 2020 को सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, बेरिया दौलत पुलिस चौकी के तत्कालीन प्रभारी दरोगा प्रकाश चंद्र टम्टा पुलिसकर्मियों के साथ पंडित जी ढाबे पर पहुंचे। उनके साथ कांस्टेबल त्रिभुवन सिंह, कांस्टेबल चंदन सिंह बिष्ट, विशेष पुलिस अधिकारी परवेज अहमद और राजवंत सिंह तथा एक अज्ञात व्यक्ति था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ढाबे की तलाशी में कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। आरोप है कि विक्रम सिंह का मोबाइल जबरन लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई, जबकि ढाबा मालिक अनिल शर्मा को कार से बेरिया दौलत चौकी ले जाया गया। जांच में कहा गया कि मौके पर अनिल शर्मा से चरस बरामद नहीं हुई और न ही बरामदगी का पंचनामा बनाया गया, बाद में चौकी में 97.70 ग्राम चरस बरामद दिखाए जाने की बात सामने आई। कांस्टेबल गणेश टोलिया पर ढाबे के रजिस्टर के कुछ पन्ने हटाने का भी आरोप जांच में दर्ज है।
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28 जुलाई 2020 को केलाखेड़ा पुलिस की टीम पंडित ढाबे के पास पहुंची थी। पुलिस का दावा था कि एक व्यक्ति को ट्रक के पीछे छिपा देखकर पकड़ा गया और उसके कब्जे से 97.70 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके आधार पर अनिल शर्मा के खिलाफ मादक पदार्थ अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
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वहीं अनिल शर्मा की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मी पहले ढाबे पर पहुंचे, कर्मचारी विक्रम सिंह के साथ मारपीट की और उसका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर पुलिस चौकी ले जाया गया। आरोप था कि मौके पर कोई चरस बरामद नहीं हुई और बाद में पुलिस चौकी में बरामदगी दिखाई गई।
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मामले में सबसे गंभीर आरोप सीसीटीवी फुटेज मिटाने का है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में प्रथम दृष्टया अनिल शर्मा को झूठे मामले में फंसाने और साक्ष्य तैयार किए जाने की बात सामने आई थी। सीसीटीवी फुटेज मिटाने की कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई थी।
हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2026 को कहा कि पुलिस के आचरण से निष्पक्ष जांच करने की उसकी क्षमता को लेकर उचित संदेह पैदा होता है। अदालत ने चरस बरामदगी की प्राथमिकी और पुलिस की कथित ज्यादती व झूठे फंसाने से जुड़े मामले, दोनों की जांच सीबीआई को सौंप दी।
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क्या हुआ था उस दिन
28 जुलाई 2020 को सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, बेरिया दौलत पुलिस चौकी के तत्कालीन प्रभारी दरोगा प्रकाश चंद्र टम्टा पुलिसकर्मियों के साथ पंडित जी ढाबे पर पहुंचे। उनके साथ कांस्टेबल त्रिभुवन सिंह, कांस्टेबल चंदन सिंह बिष्ट, विशेष पुलिस अधिकारी परवेज अहमद और राजवंत सिंह तथा एक अज्ञात व्यक्ति था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ढाबे की तलाशी में कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। आरोप है कि विक्रम सिंह का मोबाइल जबरन लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई, जबकि ढाबा मालिक अनिल शर्मा को कार से बेरिया दौलत चौकी ले जाया गया। जांच में कहा गया कि मौके पर अनिल शर्मा से चरस बरामद नहीं हुई और न ही बरामदगी का पंचनामा बनाया गया, बाद में चौकी में 97.70 ग्राम चरस बरामद दिखाए जाने की बात सामने आई। कांस्टेबल गणेश टोलिया पर ढाबे के रजिस्टर के कुछ पन्ने हटाने का भी आरोप जांच में दर्ज है।