{"_id":"59215c594f1c1b4273535bf5","slug":"pure-water-shortage-in-gangotri-dham","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगोत्री में शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगोत्री में शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sun, 21 May 2017 02:52 PM IST
विज्ञापन
gangotri dhaam
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगोत्री में श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। फिल्टर टैंक की व्यवस्था नहीं होने से नलों में रेतीला गादयुक्त पानी के साथ कीड़े मकोड़े आना आम बात है। हालांकि जल संस्थान ढाई करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर पुरानी जर्जर पेयजल लाइन को पुनर्गठित करने में जुटा है।
विज्ञापन
गंगोत्री धाम के लिए पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत नेशनल पार्क के भीतर हमक्या नाला है। ग्लेशियर वाले इस स्रोत पर गर्मी बढ़ने से रेतीला पानी टैंक में पहुंचकर सीधे नलों में चला जाता है। अपर्याप्त व त्रुटिपूर्ण फिल्टर चैंबर के कारण कभी चैंबर गाद से पट जाता है। स्थिति यह है कि यात्रियों को सुबह नहाने के लिए कई बार भागीरथी से पानी ढोना पड़ रहा है।
विज्ञापन
पकोड़ा नाला की ओर एक स्रोत का पानी टेप तो किया गया है, लेकिन यह शुद्ध पानी धाम के कुछ ही हिस्सों तक पहुंच रहा है। इस साल जल संस्थान फिल्टर चैंबर की मरम्मत कर उसे काम चलाऊ बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हमक्या नाला स्रोत से आने वाले रेतीली गादयुक्त पानी को साफ करने की स्थिति में नहीं है।
विज्ञापन
जल संस्थान ने योजना को पुनर्गठित करने का प्रस्ताव तो तैयार किया है, लेकिन पैसे मिलने के साथ ही सुरक्षित जगह पर प्रस्तावित दो बड़े फिल्टर चैंबर बनाने के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क की बंदिश से निपटने में भी कितना समय लगेगा यह कहा नहीं जा सकता। यात्रा मजिस्ट्रेट चक्रधर सेमवाल स्वीकार करते हैं कि हमक्या नाला स्रोत पर पर्याप्त फिल्टर प्रणाली तैयार किए बिना गंगोत्री के लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलना मुश्किल है।
गंगोत्री में इस साल पुराने फिल्टर चैंबर को ठीक कराया जा रहा है। योजना में दो बड़े फिल्टर चैंबर तथा जल वितरण प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के लिए पाइपों को बदलने के लिए ढाई करोड़ रुपये का इस्टीमेट एडीबी को भेजा गया है।
- वीरेंद्र वर्मा, ईई, जल संस्थान उत्तरकाशी