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पहाड़ों में नहीं बन सकेंगे अब बेतरतीब आशियाने

Thu, 25 Aug 2016 08:57 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 Aug 2016 08:57 AM IST
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Provision for construction in hill area
- फोटो : demo pic

उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अब निर्धारित प्रावधानों के विपरीत व्यावसायिक और आवासीय भवनों का निर्माण किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकेगा।

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एमडीडीए और आवास विभाग जैसी सरकारी एजेंसियों के अलावा आपदा प्रबंधन विभाग की ‘बिल्डिंग बाइलाज कमेटी’ इस पर सख्त नजर रखेगी। कमेटी निर्माण एजेंसियों को अहम भी सुझाव देगी।
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सरकार की ओर से कराई गई जांच में यह बात सामने आई है कि पर्वतीय इलाकों में तमाम जगहों पर ऐसे मकान बनाए गए हैं, जो आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। बता दें कि मानसून शुरू होने के साथ ही पिथौरागढ़, चमोली समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में आई प्राकृतिक आपदाओं के चलते जहां 100 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 650 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
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राज्य के पर्वतीय इलाकों में भूकंप, अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी आपदाओं से होने वाली तबाही के दौरान जानमाल के भारी नुकसान को कम करने के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव सी रविशंकर की मौजूदगी में हुई बैठक में पूछा गया कि आवासीय योजनाओं से जुड़े एमडीडीए, आवास विभाग जैसे सरकारी विभाग भवनों के निर्माण में आपदा प्रबंधन के निर्धारित कानूनों का पालन हो रहा हैं या नहीं? आवासीय योजनाओं के लिए निर्धारित मानक क्या हैं? आपदा के लिहाज से इन निर्धारित मानकों का अनुपालन हो रहा है या नही? इसका विधिवत परीक्षण कराया जाए।

विभागों की ओर से आवासीय कानूनों को लागू कराने को लेकर क्या व्यवस्था है? वर्तमान व्यवस्था प्रभावी है या नहीं? व्यवस्था पूरे राज्य में लागू है या फिर आंशिक तौर पर कुछ ही जिलों में प्रभावी है? इसका भी अध्ययन कराया जाए।

बिल्डिंग बाइलाज कमेटी यानी बीबीसी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि एमडीडीए, आवास विभाग समेत तमाम निर्माण एजेंसियों की ओर से जो भी निर्माण कराए जा रहे हैं, उनका ढांचा और स्थान आपदा प्रबंधन के लिहाज से ठीक है या नहीं? इसका परीक्षण आईआईटी रुड़की और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की जैसी देश की नामीगिरामी तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से कराया जाए।


आपदा प्रबंधन विभाग के उपसचिव संतोष बडोनी ने बताया कि बाइलाज कमेटी तमाम पहलुओं का अध्ययन करने के साथ ही निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों को अपने सुझाव भी देगी, ताकि उनका अनुपालन सुनिश्चित कराया जा सके।

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