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उत्तराखंड खाली करो यूपी वालों

Tue, 02 Sep 2014 03:59 PM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 02 Sep 2014 03:59 PM IST
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property dispute between up and uttarakhand

कहने को यूपी उत्तराखंड का बड़ा भाई है मगर छोटे भाई पर चौधराहट भी दिखाता रहता है। अपने नियंत्रण वाली लोहिया हेड तटबंध की सुरक्षा दीवार टूटने से मची तबाही के बाद भी यूपी की चौधराहट जारी रही।

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उत्तराखंड के खटीमा में जान-माल की भारी तबाही के बावजूद यूपी सिंचाई विभाग के सुर में अकड़ बरकरार थी। यूपी के सिंचाई विभाग के एक बड़े अफसर ने धमकी भरे लफ्जों में कहा कि उत्तराखंड अपनी सुरक्षा करे, हमारी फसलें सूख रही हैं, हम तो पानी छोड़ते रहेंगे।
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यही नहीं, उत्तराखंड के दर्जनों बांधों, जलाशयों, आवासों पर यूपी का कब्जा है। यह कब्जा छोड़ने के लिए वह तैयार नहीं। लापरवाही उत्तराखंड के सियासदां और अफसरों की भी है, जो अपनी ही संपत्ति हासिल करने के लिए ढंग से पैरोकारी नहीं कर पा रहे।
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शारदा नहर की घटना के बाद से यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे के विवाद का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। उत्तराखंड सरकार और आला अफसरों का मानना है कि यदि लोहिया हेड तटबंध पर उसका अधिकार होता तो वह समय रहते सुरक्षा उपाय कर लेते और तबाही कम होती।

आज भी इन संपत्तियों पर यूपी का कब्जा

property dispute between up and uttarakhand

राज्य गठन के बाद से सिर्फ हरिपुर बोर और तुमड़िया डैम को ही यूपी से वापस लिया जा सका। 2010 में जब सारी परिसंपत्तियां लेने की कोशिश हुई तो मामला और बिगड़ गया। उस समय रुड़की स्थित यूपी के नियंत्रण सिंचाई विभाग की संपत्तियों पर अवैध रूप से काबिज होने की कोशिश की गई थी।

इसके चलते उम्मीद भी खत्म हो गई। यूपी के अफसर सर्वोच्च न्यायालय चले गए और कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दे दिए। इसके बाद आज भी इन संपत्तियों पर यूपी का कब्जा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने यथास्थिति के साथ ही गंगा मैनेजमेंट बोर्ड को मामले के निस्तारण केनिर्देश दिए हैं। लगभग चार साल बीत गए। यूपी और उत्तराखंड ने बोर्ड में अपना-अपना ड्राफ्ट बनाकर दिया है लेकिन निस्तारण का इंतजार है।

उत्तराखंड में आज भी यूपी का जबरदस्त हस्तक्षेप है। इसे समाप्त करने की बात तो हर सरकार करती है लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। राज्य में स्थित नानक सागर डैम, बैगुल जलाशय, धौरा जलाशय, बनबसा डैम, भीमगौड़ा, कालागढ़ में रामगंगा डैम पर यूपी का कब्जा है लेकिन पहले राज्यों के बीच बैठकों का दौर जारी रहा।

इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, कई सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामला गंगा मैनेजमेंट बोर्ड को सौंप दिया। पिछले जनवरी के बाद अभी तक बोर्ड की कोई बैठक नहीं हो सकी।

परिसंपत्तियों पर कब्जे की स्थिति

property dispute between up and uttarakhand

दूसरी ओर, शासनादेश के बावजूद राज्य के भीतर 41 नहरों पर भौतिक रूप से उत्तराखंड को स्वामित्व नहीं मिल सका। इनमें हरिद्वार में 28 और यूएस नगर में 13 नहरें हैं। इसके लिए भी यूपी कैबिनेट के फैसले का इंतजार हो रहा है।

हरिद्वार की संपत्तियों पर यूपी का कब्जा बरकरार है। गंगनहर का अधिकतर पानी यूपी के काम आ रहा है। उत्तराखंड में स्थित 1180 भवनों पर यूपी का कब्जा बना हुआ है। हरिद्वार में स्थित सिंचाई विभाग के 1064 आवासीय भवनों पर यूपी काबिज है।

रिटायर हो चुके यूपी के कर्मचारियों तक ने कब्जा नहीं छोड़ा है। कुछ ने कब्जाए आवासों को बाहरी लोगों को बेच दिया है। जबकि उत्तराखंड सिंचाई विभाग के कर्मचारी आवास के लिए अब तक भटक रहे हैं। 14 निरीक्षण भवन और एक नहर अस्पताल यूपी के पास है।

25 कार्यालय भवनों में यूपी के अधिकारी-कर्मचारी बैठते हैं। 39 स्टोर भी इन्हीं के काम आ रहे हैं। नौ फील्ड हॉस्टल, तीन गैराज, 24 अस्थायी शेड और एक वर्कशाप पर यूपी का कब्जा है। जबकि डामकोठी क्षेत्र के कई आवास नहर चौड़ीकरण की भेंट चढ़ गए हैं।

आरोप है कि यूपी के कर्मचारी गंगा किनारे की जमीनों पर अवैध कब्जा कराकर मोटी कमाई भी कर रहे हैं। गंगा से रातदिन सैकड़ों घोड़ा बुग्गियों, खच्चरों से रेत, बजरी निकाली जा रही है।

यथास्थिति के आदेश के बाद भी नहर का चौड़ीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में परिसंपत्तियों का बटवारा होने तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। लेकिन इस आदेश की अवमानना करते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग मायापुर में स्कैब चैनल का निर्माण, नहर चौड़ीकरण का कार्य करवा रहा है।

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