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आसान नहीं है विशेष सत्र की राह, अभी हैं कई पेंच

Fri, 01 Jul 2016 02:00 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 01 Jul 2016 02:00 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट में हरीश रावत दे चुके हैं हलफनामा कि पारित हो चुका है मनी बिल
  • संसद से लेखानुदान पास कर केंद्र साफ कर चुका है कि मनी बिल पारित नहीं
  • ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले विशेष सत्र से खड़े हुए संवैधानिक सवाल

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problem in special session of uttarakhand assembly.
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला

विस्तार

चार जुलाई से प्रस्तावित राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में बजट लाने की राह अभी आसान नहीं है। संवैधानिक रूप से कई सवाल खड़े हैं, जिनका जवाब खुद सरकार को सत्र से पहले ढूंढना होगा। मार्च में शुरू हुई राजनैतिक लड़ाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में हरीश रावत द्वारा मनी बिल पास होने का हलफनामा दाखिल करना और केंद्र सरकार द्वारा मनी बिल पास नहीं होने की दशा में राज्य का लेखानुदान संसद से पास कराना, दोनों ही विरोधाभासी घटनाएं हैं।

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सवाल यही है कि क्या हरीश रावत अपने उस हलफनामे को वापस लेंगे, या केंद्र 18 मार्च के मनी बिल पास होने की बात से सहमत हो जाएगा, दोनों ही असंभव है। इन तमाम बिन्दुओं के मद्देनजर कई राजनीतिक चिंतक तो सत्र के आयोजन को भी संदेह जता रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने 4 और 5 जुलाई को बजट के लिए विशेष सत्र बुलाया है। कैबिनेट से चालीस हजार करोड़ के बजट को पारित करने के प्रस्ताव पर मुहर लग चुकी है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में मनी बिल पर 12 जुलाई को सुनवाई होनी है, जिससे पहले सरकार सदन में बजट पास करवाएगी।

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बजट पारित करने पर मुश्किल में पड़ सकती हैं सरकार

problem in special session of uttarakhand assembly.
हरीश रावत - फोटो : पीटीआई

विशेष सत्र में सरकार चार माह के लेखानुदान के बाद शेष बजट को पेश पारित करवाने का प्रयास करेगी। हालांकि सरकार यह कह रही है कि मनी बिल पास है तो उसे बजट लाने की जरूरत क्या आन पड़ी। सरकार के बजट सत्र से सुप्रीम कोर्ट में 12 जुलाई को होने वाली सुनवाई में केंद्र को यह साबित करने का एक आधार मिल सकता है कि मनी बिल पास नहीं हुआ।

इन स्थितियों में सरकार का विशेष सत्र बुलाकर बजट पारित करने पर विपक्ष पहले ही सवाल खड़े कर रहा है। बजट सत्र में अगर सरकार बजट पास कर लेती है तो 18 मार्च की स्थिति को लेकर फिर सवाल खड़ा हो जाएगा।

अगर हरीश सुप्रीम कोर्ट से अपना हलफनामा वापिस लेते है कि मनी बिल पास नहीं हुआ तो 18 मार्च को सरकार के अल्पमत में होने का सवाल खड़ा हो जाएगा। ऐसे में सत्र के दौरान सरकार बजट को किस रूप में लाती है यह देखा जाना अहम रहेगा। सरकार का कदम पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

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