फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   problem in hydropower production.

उत्तर भारत में गहराएगा बिजली का महा संकट!

Wed, 03 Dec 2014 03:25 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, चमोली/उत्तरकाशी
ब्यूरो / अमर उजाला, चमोली/उत्तरकाशी Updated Wed, 03 Dec 2014 03:25 PM IST
विज्ञापन
problem in hydropower production.

उत्तरभारत में बिजली का महा संकट गहरा सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार धीमी होने की वजह से नदियों के पानी में कमी आ गई है।

विज्ञापन


इस कारण उत्तर भारत में बिजली की आपूर्ति करने वाली पनबिजली परियोजनाओं में बिजली का उत्पादन 43-75 फीसदी तक गिर गया है।

पिछले साल के मुकाबले इस बार नवंबर के अंत तक जल विद्युत उत्पादन की रफ्तार भी 10-15 फीसदी कम है, जबकि सर्दियों के चलते मांग बढ़ी है।

ठंड बढ़ने पर आने वाले महीनों में उत्पादन और गिरने की आशंका है। देश में कोयले के बाद सबसे ज्यादा पन बिजली उत्पादन पर निर्भरता के चलते आगामी दिनों में उत्तर भारत में बिजली संकट गहराने की आशंका और बढ़ गई है।
विज्ञापन


जिन हिमालयी परियोजनाओं में बिजली का उत्पादन गिरा है, उनमें हिमाचल प्रदेश की नाथपा झाखड़ी और लारजी परियोजनाएं शामिल हैं, जहां से उत्तरी ग्रिड को बिजली की आपूर्ति की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड के विष्णुप्रयाग से यूपी को बिजली मिलती है, जहां 400 मेगावाट के बजाय सिर्फ 120 मेगावाट बिजली ही बन रही है।

यूपी पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर

problem in hydropower production.

उत्तराखंड के बिरही गंगा प्रोजेक्ट में 7.2 के बजाय सिर्फ 2 मेगावाट बिजली बन रही है और ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में 13.2 के बजाय 7 मेगावाट बिजली ही बन रही है।

उधर जम्मू में केंद्रीय सेक्टर के तहत एनएचपीसी की 1889 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली सात परियोजनाओं में करीब 20-25 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।

हिमाचल प्रदेश की पन बिजली परियोजनाओं में गर्मियों में जहां 200 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही थी, वहीं अब यह घटकर 50 लाख यूनिट तक आ गई है।

लखनऊ के अभियंता भी मानते हैं कि यूपी में 15 दिसंबर के बाद थोड़ी किल्लत हो सकती है, लेकिन उनका कहना है कि पनबिजली पर ज्यादा निर्भरता नहीं होने के चलते हिमालयी पनबिजली उत्पादन की कमी का यूपी में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फिर भी विष्णुप्रयाग से यूपी को होने वाली बिजली की सप्लाई कम होकर 120 मेगावाट पर आ चुकी है, यदि यह 100 मेगावाट से कम हुई तो यहां भी असर पड़ने लगेगा।

पिछले वर्षों की अपेक्षा अधिक गिरावट

problem in hydropower production.

जम्मू में वर्ष 2013 में नवंबर महीने के अंत तक पन बिजली उत्पादन में पंद्रह से बीस फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष यह गिरावट 20-25 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

उत्तराखंड में पिछले साल आपदा के चलते बिजली उत्पादन बाधित हुआ था, लेकिन वर्ष 2012 के मुकाबले इस बार पांच से दस फीसदी की गिरावट दर्ज की जा रही है। माना जा रहा है कि इस साल ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है।

‘यूपीसीएल (उत्तराखंड) को चमोली जिले में स्थित पांच परियोजनाओं से करीब 14 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। अगस्त में 32 मेगावाट बिजली मिल रही थी। नदियों में जलप्रवाह कम होने से ऐसा हुआ है।’
- वीरेंद्र पंवार, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम

‘अप्रैल से सितंबर तक ग्लेशियर पिघलते हैं। नवंबर, दिसंबर में बर्फ का जमाव शुरू हो जाता है। ऐसे में इनका पिघलना कम हो जाता है। इसी वजह से सर्दी के दिनों में कई नदियों में पानी कम हो जाता है।’
- डॉ. सुषमा गैरोला, वैज्ञानिक, उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed