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स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इलेक्ट्रिक बसें मुहैया कराने के अपने वादे से मुकरी निजी कंपनी
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स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत राजधानी की सड़कों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों के लिए फिलहाल परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ ही शहरियों को भी इंतजार करना होगा। पांच अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें मुहैया कराने वाली कंपनी न सिर्फ अपने वादे से मुकर गई है, बल्कि वादे के मुताबिक बसें भी नहीं मुहैया करा पाई है।
उधर, स्मार्ट सिटी परियोजना सीईओ/जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि निर्धारित अवधि में इलेक्ट्रिक बसें नहीं मुहैया कराने वाली कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना है। इन सभी बसों को जून 2022 तक संचालित किया जाना था, लेकिन अभी राजधानी की सड़कों पर सिर्फ 10 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो पाया है। इलेक्ट्रिक बसें मुहैया कराने वाली कंपनी ने कोरोना संकट का हवाला देते हुए पहले तो गाड़ियां मुहैया कराने से ही हाथ खड़े कर दिए, लेकिन जब कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य हुई और स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों ने दबाव बनाया तो कंपनी 31 मई तक पांच और इलेक्ट्रिक बसें देने को राजी हुई।
लेकिन 31 मई की तिथि गुजर चुकी है और अभी तक कंपनी बसें नहीं करा पाई है। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन नहीं होने की स्थिति में जहां शहरियों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही, वहीं स्मार्ट सिटी पर योजना को धरातल पर उतारने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर स्मार्ट सिटी परियोजना सीईओ/जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि इस संबंध में जल्द ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड और निजी कंपनी के अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी और इसकी जानकारियां जुटाई जाएंगी कि आखिरकार किन परिस्थितियों में बसों की आपूर्ति नहीं हो पा रही और यदि आपूर्ति में निजी कंपनी के स्तर पर कोई लापरवाही पाई जाती है, तो कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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स्मार्ट सिटी परियोजना के निर्माण कार्य में और उससे जुड़ी तमाम सुविधाओं को जून 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अभी से जुलाई 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले तो स्मार्ट सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी थे, लेकिन वर्तमान सीईओ एवं जिलाधिकारी ने कार्यभार संभालने के बाद जब स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों पर दबाव बनाया तो निर्माण कार्य में तेजी आई है।
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उधर, स्मार्ट सिटी परियोजना सीईओ/जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि निर्धारित अवधि में इलेक्ट्रिक बसें नहीं मुहैया कराने वाली कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना है। इन सभी बसों को जून 2022 तक संचालित किया जाना था, लेकिन अभी राजधानी की सड़कों पर सिर्फ 10 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो पाया है। इलेक्ट्रिक बसें मुहैया कराने वाली कंपनी ने कोरोना संकट का हवाला देते हुए पहले तो गाड़ियां मुहैया कराने से ही हाथ खड़े कर दिए, लेकिन जब कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य हुई और स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों ने दबाव बनाया तो कंपनी 31 मई तक पांच और इलेक्ट्रिक बसें देने को राजी हुई।
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लेकिन 31 मई की तिथि गुजर चुकी है और अभी तक कंपनी बसें नहीं करा पाई है। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन नहीं होने की स्थिति में जहां शहरियों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही, वहीं स्मार्ट सिटी पर योजना को धरातल पर उतारने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर स्मार्ट सिटी परियोजना सीईओ/जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि इस संबंध में जल्द ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड और निजी कंपनी के अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी और इसकी जानकारियां जुटाई जाएंगी कि आखिरकार किन परिस्थितियों में बसों की आपूर्ति नहीं हो पा रही और यदि आपूर्ति में निजी कंपनी के स्तर पर कोई लापरवाही पाई जाती है, तो कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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स्मार्ट सिटी परियोजना के निर्माण कार्य में और उससे जुड़ी तमाम सुविधाओं को जून 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अभी से जुलाई 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले तो स्मार्ट सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी थे, लेकिन वर्तमान सीईओ एवं जिलाधिकारी ने कार्यभार संभालने के बाद जब स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों पर दबाव बनाया तो निर्माण कार्य में तेजी आई है।