राष्ट्रपति शासन बनेगा चुनावी मुद्दा, कुंजवाल के सवाल तैयार
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2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे के खुलकर उभर आने की जमीन तैयार हो गई है। विपक्ष के बार-बार के आरोपों से नाराज विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का तो साफ कहना है कि चुनाव में वे अपनी विधानसभा में इस मुद्दे को खुलकर उठाएंगे। इसके लिए कुंजवाल ने तीन सवाल भी तैयार कर लिए हैं। उनका कहना है कि ये वे सवाल हैं जिनका अभी तक उत्तर नहीं मिला है।
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही अब तक राष्ट्रपति शासन के मुद्दे पर खामोश रहे विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भी मुखर हो गए हैं। रानीखेत में आयोजित एक समारोह में हाल ही में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कुंजवाल ने राष्ट्रपति शासन के मुद्दे पर विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया।
कुंजवाल का कहना है कि वे प्रदेश में लगाए गए राष्ट्रपति शासन के मामले को चुनाव प्रचार के दौरान अपने विधानसभा क्षेत्र में भी खुलकर उठाएंगे। इसके लिए वे सीधे-सीधे तीन सवाल पूछ रहे हैं। उन्हें इस बात का भी अहसास है कि वे विधानसभा अध्यक्ष हैं और विपक्ष के सबसे अधिक निशाने पर हैं।
चुनाव में गरमाएगा राष्ट्रपति शासन का मुद्दा
कुंजवाल यह भी जान रहे हैं कि प्रदेश भाजपा चुनाव के दौरान कम से कम उनके विधानसभा क्षेत्र में उन्हें नहीं बख्शने वाली। ऐसे में कुंजवाल का मुखर होना चुनावी तैयारी का हिस्सा भी माना जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष के इस नए रुख से अब साफ है कि 2017 में राष्ट्रपति शासन चुनावी मुद्दा भी बनेगा। प्रदेश भाजपा इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कह नहीं पा रही है। कारण यह भी है कि कांग्रेस के बागी नौ पूर्व विधायक अब भाजपा में हैं। एक रणनीति के तहत प्रदेश भाजपा ने इस मुद्दे का पूरा दारोमदार इन्हीं नौ बागियों और केंद्रीय भाजपा नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का देहरादून में दून स्कूल के कार्यक्रम में इस मुद्दे को उठाना यह साबित भी कर रहा है। अब चुनाव प्रचार के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का रुख उत्तराखंड की ओर होगा। ऐसे में इस मुद्दे को हवा मिलेगी।
स्पीकर पर सवाल को बताया सुप्रीम कोर्ट की अवमानना
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बार-बार राष्ट्रपति शासन का मुद्दा उठा रहे हैं। मेरा कहना है कि सुप्रीम कोर्ट प्रदेश में सरकार को बहाल कर यह साफ कर चुका है कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला सही था। इसके बाद भी अगर विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाया जाता है तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं है क्या? अगर इसी तरह से चलता रहा तो विधानसभाओं का संचालन असंभव हो जाएगा। मैं इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में खुलकर उठाऊंगा।
-गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष
कुंजवाल के तीन सवाल
-सरकार को अस्थिर करने, उसे गिराने का प्रयास क्यों किया गया?
-प्रदेश में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया?
-प्रदेश सरकार का सदन से पारित बजट क्यों रोका गया? विधानसभा अध्यक्ष की सहमति से पारित बजट को गवर्नर ने क्यों रोके रखा?