'आप' में प्रशांत भूषण ने लगाई पहली सेंध, कैसे? पढ़ें...
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स्वराज अभियान के स्वराज संवाद के जरिये प्रशांत भूषण और प्रोफेसर आनंद कुमार पहली सेंध आम आदमी पार्टी में लगा रहे हैं।
स्वराज अभियान राजनीतिक दल में तब्दील हो, इसके पहले आप के असंतुष्टों को जोड़ कर जमीन मजबूत करने की कोशिश हो रही है। शनिवार को देहरादून में कार्यक्रम के दौरान आप के उत्तराखंड संयोजक रणवीर सिंह ने प्रशांत भूषण से मुलाकात की।
जिला संयोजक संजय भट्ट, राज्य आंदोलनकारी कमला पंत समेत दूसरे आप नेता स्वराज-संवाद में साथ रहे। स्वराज अभियान से जोड़ने की प्राथमिकता पर आप के असंतुष्ट नेता और कार्यकर्ता हैं।
प्रशांत भूषण ने साफ किया कि आम आदमी पार्टी के कांग्रेस, भाजपा की तरह राजनीतिक दल बन जाने और अरविंद केजरीवाल के पार्टी सुप्रीम बनने से सिद्धांत की राजनीति करने वाले खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
उन्हें जोड़ने के लिए स्वराज अभियान शुरू किया गया है। पार्टी की घोषणा से पहले वार्ड और गांव स्तर पर कमेटियां बनाई जा रही हैं। इनकी जिम्मेदारी ‘आप’ से जुड़े लोगों को दी जा रही है।
‘आप’ में दान लेने की पारदर्शिता, खर्च में नहीं
स्वराज अभियान (उत्तराखंड) के तहत ‘स्वराज-वैकल्पिक राजनीति एवं शिक्षा-स्वराज’ पर शनिवार को संवाद का केंद्र दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ही रहे। आप के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह अभियान वैकल्पिक राजनीतिक माहौल बनाने के लिए चलाया जा रहा है। बोले, ‘आप’ में डोनेशन लेने भर की पारदर्शिता है, लेकिन इसे खर्च कहां किया जाता है, कोई नहीं जानता।
अभियान संयोजक प्रोफेसर आनंद कुमार संवाद खत्म होने के बाद दिल्ली से दून पहुंचे। संवाद में प्रशांत से पहले स्थानीय नेताओं ने उत्तराखंड की समस्याएं उठाते हुए भाजपा-कांग्रेस सरकारों की बखिया उधेड़ी। प्रशांत ने कहा कि वे ‘आप’ को आदर्श पार्टी बनाना चाहते थे, जिसका सत्ता साधन हो, उद्देश्य नहीं। सत्ता और नीति में सीधे आम आदमी का दखल हो, लेकिन ऐसा न होने पर हताशा में पार्टी से निकले।
गांव की समस्याओं का वहीं समाधान हो
संवाद में कहा गया कि गांवों की समस्याओं के समाधान पर केंद्र नीतियां बनाती है। जहां की समस्या है, वहीं पर समाधान हो। उत्तराखंड की समस्याएं यहीं के लोग सुलझाएं। प्रदेश का नेतृत्व प्रदेश से निकले, थोपा न जाए।
केजरी से मूंछ की लड़ाई नहीं
प्रशांत भूषण ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ट्रैक पर आ जाएं तो साथ आने में गुरेज नहीं। राजनीति मूंछ की लड़ाई नहीं है, सिर्फ मुद्दों की है। हंसकर बोले, यह असंभव है, चमत्कार हो, तभी ऐसा हो सकता है। कहा, अन्ना ठीक कहते थे कि राजनीति दलदल है, जाओगे तो फंसोगे। लेकिन सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता हथियाने वाले भ्रष्टाचारियों को रोकने का कोई रास्ता नहीं था।