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मलिन बस्तियों में हो रही वोटों की 'बुआई'

Wed, 18 Dec 2013 12:05 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 18 Dec 2013 12:05 PM IST
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सरकार ने भले ही मालिकाना हक देकर देहरादून की मलिन बस्तियों में आगामी लोकसभा चुनाव से पहले वोटों की खेती शुरू करने की कोशिश की है। लेकिन खेत में वोटरों की ‘फसल’ लहलहाएगी या नहीं यह कहना मुश्किल है।

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जिन 118 मलिन बस्तियों को सरकार मालिकाना हक देने जा रही है वे हादसों के मुहाने पर हैं। यही वजह है कि यहां रहने वाले अब दूसरी जगह बसना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उनका विस्थापन कर दे।
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बस्तियां अति संवेदनशील हैं
शहर की ज्यादातर मलिन बस्तियां टिहरी संसदीय क्षेत्र में आती हैं। राजपुर रोड विधानसभा सीट के दायरे में ही साठ से अधिक बस्तियां हैं। राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से बिंदाल और रिस्पना नदी गुजरती है। ये बस्तियां इन्हीं नदियों के किनारे हैं।

हादसों की तलहटी में बसी बस्तियां अति संवेदनशील हैं। बारिश में जब नदियों में पानी उफान पर होता है तो दर्जनों घर उसमें समा जाते हैं। गत वर्ष मानसून में दस घर ढह गए थे। इस दौरान नौ लोग उफनती नदी में विलीन हो गए थे। लोगों का कहना है कि ऐसी जगह पर कौन रहना चाहेगा जहां हमेशा मौत मंडराती हो।

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चालीस सालों से इस बस्ती में रह रही गुरदेई देवी ने बताया यहां के लोग सालों से परेशान हैं। बरसात में नदी का पानी घरों में घुस जाता है। बच्चों को लेकर बाहर निकलना पड़ता है।

नगर निगम हमें यहां से हटाना चाहता है लेकिन उसके बदले हमें कोई जगह या मुआवजा देना नहीं चाहता। अंजू पच्चीस साल से इस बस्ती में रह रही हैं। अंजू का कहना है मालिकाना हक तो ठीक है लेकिन यहां पर हमारी सुरक्षा की गारंटी भी तो सरकार ले।

संजय का कहना है कि सरकार जो करने जा रही हे हम उसका स्वागत करते हैं। कम से कम हम भी बेहतर जिंदगी जी सकेंगे। ऊषा कहती हैं कि सरकार को मालिकाना हक देने के साथ ही सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन की भी व्यवस्था करनी चाहिए। यहां तो हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

दो माह चलता है मौत का तांडव
बिंदाल और रिस्पना नदी दो महीने तक अति संवेदनशील जोन में चली जाती है। इन नदियों में मानसूनी महीनों में हर साल मौत का तांडव होता है। पानी का बहाव इस कदर तेज हो जाता है कि कई घर उसमें समा जाते हैं।
साल - मौत
2011 - 06
2012 - 09
2013 - 06

39 साल पुरानी हैं मलिन बस्तियां
विधायक राजकुमार मंगलवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिले और उनसे मलिन बस्तियों का मालिकाना हक जल्द देने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।


विधायक राजकुमार ने बताया कि दून में मलिन बस्तियां 1974 से 77 के बीच बसी हैं। अभी शहर में 175 बस्तियां हैं जिनमें 33 हजार परिवारों में ढाई लाख लोग रहते हैं। बताया कि इन बस्तियों में गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति, भूतपूर्व सैनिक, विकलांग, निराश्रीत विधवाएं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गके लोग रहते हैं।

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इन लोगों ने लंबे समय तक सार्वजनिक नलों से पानी पीया और दीये की रोशनी में जीवनयापन किया। यहां पेयजल व विद्युत संयोजन के लिए शासन ने नवंबर 1984 में सहमति दी थी। 1985 में यहां पर पानी और बिजली की लाइनें पड़नी शुरू हुईं।

इसलिए इस समय से पूर्व बसे लोगों द्वारा कोई शासकीय दस्तावेज दिखाना कठिन है। विधायक राजकुमार ने तीन सूत्रीय ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा। इसमें बस्तियों की सुरक्षा, खासकर बाढ़ संबंधी, सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।

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