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दबंग कहे जाने से नाराज है नेताजी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 15 Feb 2015 02:53 PM IST
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देहरादून के लाल बत्ती धारी एक बलशाली नेता खुद को मीडिया में दबंग कहे और लिखे जाने से नाराज हैं।
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उनकी शारीरिक संरचना और डील डौल तो पहलवान टाइप था ही उन्हें महकमा भी ऐसा मिला है जहां आम आदमी हाथ नहीं डालता। सरकार ने शायद सोच समझकर उन्हें ये जिम्मेदारी है।
माफियाओं से निपटने के लिए सरकार को ऐसे किसी दबंग नेता की आवश्यकता थी। और तो और इन दिनों जनाब ने अपनी मूंछे भी ऊपर की चढ़ा ली हैं। किसी ने पूछा तो बोले, जब सब दबंग कहते हैं तो मूंछों का इफेक्ट भी तो आना चाहिए।
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जो खिलाएगा वो कमाएगा
सरकार पर रोजगार न देने के आरोप से परेशान एक मंत्री को बड़ी पीड़ा है। बेरोजगार युवाओं के लिए सरकार खजाना खाली कर उन्हें भत्ता दे रही है और बेरोजगार युवा हैं कुछ भी कह रहे हैं।
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मंत्री जी, ने तुरंत आदेश जारी किया। फोर्थ क्लास में भरती की जाए। कुछ जो जानकार थे- चिल्लाने लगे। अरे साहब, फोर्थ क्लास की भरती बंद है। छठे वेतन आयोग ने इसे मृत संवर्ग माना है। मंत्री जी की पीड़ा पर मरहम तो लगना ही था। उन्होंने आदेश जारी किया और अपने विभाग के अधीन संस्थाओं में कमेटी बनाकर नियुक्ति शुरू करा दी।
अब आरोप लग रहे हैं कि चहेते भरती हो रहे और वह भी... कुछ खास। संस्थाएं भी कह रही हैं कि साहब इन्हें परीक्षा दिलवाकर बाबू बनाना पड़ेगा। भरती आउटसोर्स ही की जा सकती है। पर सब दरकिनार। पीड़ा हो तो क्या नहीं हो सकता। जो खिलाएगा वो कमाएगा भी।
होनी थी सर्जरी कर दिया डिस्चार्ज
इन दिनों सेहत महकमे की अपनी सेहत नासाज हो गई है। सेहत सुधारने के जिम्मेदार गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। उन्हें घपलों घोटालों की बीमारी जो लग गई है। लिहाजा शासन के आलाधिकारी राज्य के मरीजों की चिंता छोड़कर ऑपरेशन का पुख्ता इंतजाम खोज रही है।
वहीं प्रशासनिक तंत्र से जुड़े नए-नवेले खुलासों पर मरहम पट्टी कर घोटाले के घाव को छुपाना चाहती है। महकमे की दो बड़ी परियोजनाओं से संबंधित गायब पत्रावलियों के पीछे कौन अधिकारी है सब जानते हैं लेकिन बिरादरी जांच नहीं कराना चाहती।
जिस अधिकारी के कार्यकाल में फाइलें उड़ाई गई उससे एक बार पूछा तक नहीं गया। पत्रावलियों के ऐसे ही गायब होने के प्रकरण की सर्जरी करने के बजाए आरोपी को बिना इंजेक्शन डिस्चार्ज किया जा रहा है।