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जातीय समीकरण साधने की जुगत में पार्टियां
बाजपुर से सुधाकर भट्ट
Updated Sat, 11 Feb 2017 12:03 PM IST
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ आर्य (दाएं)
- फोटो : AmarUjala
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कांग्रेस में बगावत से प्रभावित बाजपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव कांग्रेस और भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। इस आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से अचानक नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री यशपाल आर्य मुस्लिम समुदाय में पैठ बनाने की कोशिश में हैं।
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मुस्लिम समुदाय के बीच आर्य अपने पांच साल के विकास कार्य का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं। उनका मूवमेंट दलित मतदाताओं के बीच भी लगातार बना हुआ है। कांग्रेस प्रत्याशी और भाजपा से बगावत करने वाली सुनीता बाजवा टम्टा का पूरा ध्यान सिख समुदाय को इकट्ठा करने और मुसलमान वोट बैंक को खिसकने न देने पर है। दलित और पर्वतीय मतदाताओं को रिझाने के लिए कांग्रेस दो बार यहां मुख्यमंत्री हरीश रावत की जनसभाएं भी करवा चुकी है।
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शुक्रवार को भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री यशपाल आर्य की गतिविधि कोसी पार के कुंडेश्वरी इलाके में ही केंद्रित रही। आर्य ने दलित बहुल भीमनगर, जुड़का, ढकिया गुलाबो आदि इलाकों में सभाएं कीं। आर्य बाद में मुसलमानों के गांव जगन्नाथपुर में भी पहुंचे। आर्य ने यहां पार्टी के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से विकास के काम कराने के आधार पर वोट मांगे। आर्य के रणनीतिकारों में से एक उपेंद्र चौधरी ने कोसी पार के मुस्लिम बहुल इलाकों पर ही फोकस किया हुआ है।
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आर्य को भाजपा के अंदर के असंतोष का सामना भी करना पड़ रहा है। भाजपा का एक धड़ा आर्य के साथ नहीं दिख रहा है। यहां से दो बार भाजपा से विधायक रह चुके अरविंद पांडेय इस बार खुद गदरपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में पांडेय की टीम भी आर्य के साथ खुलकर खड़ी नहीं है। भाजपा के पूर्व प्रत्याशी राजेश कुमार आर्य के साथ घूम रहे हैं। पूर्व सांसद बलराज पासी भी सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।
आर्य के कांग्रेस के पहले के सहयोगी रहे हरमिंदर लाडी आर्य के साथ हैं, लेकिन बाजपुर में प्रभावशाली माने जाते कांग्रेसी जनकराज शर्मा का परिवार भी इस समय आर्य से दूर ही है। कुछ समय पहले तक इस परिवार के जितेंद्र शर्मा सोनू आर्य के साथ दिखते थे। कांग्रेस के अविनाश शर्मा इस समय सुनीता टम्टा बाजवा के प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। जनकराज शर्मा के परिवार की पैठ मुस्लिम समाज में मानी जाती है।
कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता टम्टा बाजवा को मुसलमान और सिख वोटों का सहारा है। यहां दर्जा राज्य मंत्री का खिताब पा चुके कदीर अहमद, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य कामरान खान पर कांग्रेस भरोसा कर रही है। सुनीता टम्टा बाजवा के पति जगतार बाजवा कभी खुद भाजपा में थे। जगतार का जुड़ाव भाजपा के गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय और पासी से भी रहा है। जगतार अब कांग्रेस में हैं।
इस समय जगतार की कोशिश सिख वोटों को संगठित करके रखने की है। कांग्रेस बोक्सा और बंजारा वोटों को साधने की कोशिश में भी है। शुक्रवार को सुनीता बाजवा ने बुक्सा समाज के बेरिया दौलत, कल्याणपुरी, तोता बेरिया आदि में जनसंपर्क किया। मैदान में बसपा के प्रत्याशी राम अवतार जाटव भी मौजूद हैं। जाटव की कोशिश भी एससी मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की है।