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बसपा के चुनावी मैदान में कूदने से चकराता में मुकाबला हुआ दिलचस्प      

Tue, 14 Feb 2017 11:56 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, चकराता
ब्यूरो / अमर उजाला, चकराता Updated Tue, 14 Feb 2017 11:56 AM IST
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political ground report on chakrata seat
प्रीतम सिंह - फोटो : AmarUjala

अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित चकराता विधान सभा सीट पर इस बार कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह और भाजपा प्रत्याशी मधु चौहान के बीच सीध मुकाबला है, लेकिन बसपा प्रत्याशी दौलत कुंवर के मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरने से यह मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

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वोटरों की चुप्पी ने भी प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ाई हुई है। यह सीट हमेशा से ही जौनसार बावर के दो दिग्गज प्रीतम और मुन्ना सिंह चौहान की प्रतिष्ठा का सवाल रही है हालांकि, हर बार मुन्ना चौहान प्रीतम के गढ़ को भेदने में असफल रहे।  लेकिन इस बार चुनावी समीकरण राज्य गठन के बाद से अब तक हुए तीन चुनाव से पूरी तरह भिन्न हैं। पहली बार भाजपा ने सशक्त उम्मीदवार के रूप में मधु चौहान को मैदान में उतारा है।
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इससे पहले वर्ष 2007 में हुए चुनाव में मधु ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रीतम को कड़ी टक्कर दी थी। प्रीतम सिंह राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक हुए तीन विधान सभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। अब तक हुए चुनाव में हालात कांग्रेस के अनुकूल रहे हैं, लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरणों के चलते हालात बदले हुए हैं। ऐसे में प्रीतम सिंह के लिए इस बार कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले चकराता को बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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बसपा के प्रत्याशी के रूप में आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के पूर्व संरक्षक दौलत कुंवर के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक हो गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और मुन्ना सिंह चौहान और उनकी पत्नी मधु चौहान की सक्रियता के चलते इस बार भाजपा भी क्षेत्र में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पूर्व तक कांग्रेस की जीत की राह आसान रही, लेकिन इस बार स्थिति बदली हुई है।


मंदिरों में दलित प्रवेश और खेड़ों को राजस्व ग्राम घोषित करने को लेकर बसपा प्रत्याशी दौलत कुंवर ने जिस तरह दलितों के बीच अपनी पैठ बनाई और मोदी के केंद्रीय सत्ता में काबिज होने के बाद यहां के राजनीतिक हालात तेजी से बदले हैं। बसपा की ओर से दौलत कुंवर के चुनाव मैदान में उतरने के बाद से कांग्रेस को एससी वोट खिसकने का डर सता रहा है। इस बार बीते चुनाव की तरह हालात पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में नही हैं। इस चुनावी समर में फिर से चुनावी मुद्दे गायब हो गए हैं। दोनों ही राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों के समर्थकों ने फिर से इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाया हुआ है। करीब एक लाख मतदाता वाले इस विधान सभा में करीब 32 प्रतिशत दलित मतदाता हैं, जो इस बार दिग्गजों का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।      

2012 में मिले वोट      
प्रीतम सिंह (कांग्रेस)- 33187      
मुन्ना सिंह चौहान(उत्तराखंड जनवादी पार्टी)- 26533      
      
निर्वाचकों की कुल संख्या      

पुरुष- 53528      
महिला- 44138      
कुल- 97666      
  
मुद्दा-
सड़क, परिवहन, चिकित्सा, सिंचाई, रोजगार, पर्यटन

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