{"_id":"57749c1b4f1c1bc97379d269","slug":"police-wireless-messages-in-danger","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे में पड़ने वाले हैं पुलिस के वायरलेस संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे में पड़ने वाले हैं पुलिस के वायरलेस संदेश
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 30 Jun 2016 10:31 AM IST
विज्ञापन
Police
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून पुलिस के वायरलेस सेट पर गूंजने वाले संदेश खतरे में पड़ने वाले हैं। इस सेवा के संचालन के लिए केंद्र द्वारा मुहैया कराए जाने वाले स्पेक्ट्रम के बिल पर लगने वाला भारी-भरकम ब्याज गृह विभाग के सामने बड़ी समस्या बन गया है।
विज्ञापन
हाल ही में केंद्र से आए एक पत्र में करीब 22 करोड़ की अदायगी के निर्देश दिए गए हैं। इस बिल में स्पेक्ट्रम का बिल मात्र पौने दो करोड़ है, जबकि इस राशि पर बीस करोड़ का ब्याज लगा हुआ है। समय से बिल की अदायगी न होने के चलते यह समस्या अब विकराल हो गई है। अब केंद्र से ब्याज माफी के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
विज्ञापन
देश भर के पुलिस तंत्र को वायरलेस सुविधा के संचालन के लिए स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होती है। इससे एक निश्चित फ्रीक्वेंसी पर सभी सेट एक-दूसरे को सूचनाओं व कार्रवाई संबंधी संदेश का आदान-प्रदान करते हैं। सभी राज्य सरकारें इस सुविधा की एवज में एक निश्चित दर से केंद्र को भुगतान करती हैं।
विज्ञापन
गृह विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष 03-04 से स्पेक्ट्रम सेवा के तहत आने वाले बिल का भुगतान लापरवाही के साथ किया जा रहा है। ब जितने का बजट जारी हुआ, बिल के सापेक्ष जमा किया जाता रहा। नतीजा यह हुआ कि चालू वित्तीय वर्ष तक करीब पौने दो करोड़ की देनदारी गृह विभाग पर आन पड़ी है। यही नहीं इतने सालों में प्रतिमाह लगभग दो फीसदी ब्याज लगाकर यह राशि करीब बाईस करोड़ रुपये की हो गई है।
हाल ही में केंद्र की ओर से एक पत्र आया है, जिसमें यह पैसा न जमा करने की दशा में स्पेक्ट्रम सुविधा से वंचित किए जाने की चेतावनी दी गई, तब जाकर महकमा हरकत में आया। यह स्थिति देख अब केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है, जिसमें ब्याज की राशि से छूट दिए जाने की बात कही गई है।
हालांकि इस पत्र का अभी कोई जवाब नहीं आया है। इस संबंध में गृह विभाग के अफसरों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन सभी चुप्पी साधे हैं।
Published By : Nirmala Suyal