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आईएएस स्टिंग मामला: 100 दिन की भागदौड़ में भी पुलिस के हाथ खाली, अब फोरेंसिक जांच पर निगाह 

Sat, 17 Nov 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 17 Nov 2018 09:43 AM IST
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Police Not Get any clue against umesh kumar after sting case investigation
उमेश कुमार

उमेश शर्मा पर पुलिस का शिकंजा शुक्रवार को ढीला पड़ गया। पुलिस 100 दिन की भागदौड़ के बाद भी कुछ हासिल करने में कामयाब नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार जो उपकरण उमेश शर्मा के पास से मिले उनमें बायोमीट्रिक और एडवांस पासवर्ड लगे हैं। ऐसे में न तो पुलिस इन पासवर्ड को हासिल कर सकी और न ही कुछ और। इस तरह अब पुलिस की आस केवल फोरेंसिक जांच के नतीजों पर ही अटकी है। 

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पुलिस ने 10 अगस्त को दर्ज किए गए मुकदमे की जानकारी को बेहद गोपनीय रखा था। यहां तक की इसकी उच्चाधिकारियों को भी भनक नहीं लगने दी गई थी। पुलिस ने एकाएक इस गोपनीय मिशन को अंजाम तक पहुंचाया और 80वें दिन 28 अगस्त को उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। दावा किया कि वहां से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मेमोरी डिवाइस मिले हैं।
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इन उपकरणों को मौके पर ही एसटीएफ की मौजूदगी में सील कर दिया गया, बावजूद इसके पुलिस इनका पासवर्ड हासिल करने के लिए उमेश का रिमांड मांगती रही। न्यायालय ने पुलिस की मांग पर सात घंटे का रिमांड मंजूर भी किया, मगर यह अवधि जेल से थाने, थाने से मसूरी रोड स्थित घर फिर घर से थाने और थाने से जेल ले जाने में ही समाप्त हो गई। 

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मायूस पुलिस ने एक बार फिर रिमांड मांगी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसी दरमियान रायपुर थाने में दर्ज 2007 के एक मुकदमे में भी उमेश की रिमांड मांगी गई। न्यायालय ने इसे भी सिरे से खारिज कर दिया। 

एक नवंबर को उमेश के खिलाफ राजपुर थाने में एक और मुकदमा दर्ज किया गया, मगर पुलिस को हासिल इससे भी कुछ नहीं हुआ। चूंकि मामला ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी का था, लिहाजा इसमें भी रिमांड का कोई आधार न्यायालय ने नहीं माना।

शुक्रवार को जब पुलिस ने जमानत को खारिज करने के जो आधार न्यायालय में रखे उन्हें भी कोर्ट ने मंजूर नहीं किया। अंतत: मुकदमा दर्ज होने के 100वें दिन न्यायालय ने उमेश को जमानत पर रिहा करने के आदेश सुना दिए।  

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