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जिसने किया दुष्कर्म उसके साथ एक ही गाड़ी में पीड़िता को अदालत लेकर गई पुलिस, नहीं दे पाई बयान

Mon, 03 Jun 2019 01:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 03 Jun 2019 01:53 PM IST
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police bring physical assault accused and victim court on same vehicle
Rape Victim - फोटो : Amar Ujala Graphics

टिहरी के नैनबाग इलाके में नौ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई है।

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उन्होंने प्रकरण में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखने की बात कही है। इसके अलावा प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाएगी।

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वहीं इस मामले में कार्रवाई करते हुए नैनबाग के बालिका रेपकांड में सीओ नरेंद्र नगर उत्तम सिंह को सोमवार को हटा दिया गया। प्रमोद शाह नए सीओ बनाए गए हैं। वहीं इस मामले की जांच सीईओ स्वपन सिंह को ट्रांसफर कर दी गई है।

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डरी मासूम ने 164 का बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी रविवार को दून अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल में मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई और वार्ड में शिफ्ट कराया। उन्होंने अपनी मौजूदगी में मासूम की कई जांचें भी करवाईं। 

इस दौरान पीड़िता के परिजनों ने आयोग अध्यक्ष को बताया कि उनकी मर्जी के बिना पुलिस मासूम को अदालत में 164 के बयान दर्ज कराने की बात कहकर साथ ले गई। पुलिस एक ही वाहन में मासूम और उसके परिजनों के साथ आरोपी को भी बिठाकर ले गई। ऐसे में आरोपी को देखकर मासूम डर गई और उसने 164 का बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया।

पुलिस की भूमिका की जांच कराने की बात कही

इसके अलावा पुलिसकर्मी सादे कपड़ों की बजाय वर्दी में थे। आयोग अध्यक्ष ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा जाएगा।

प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच करायी जाएगी। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने दून महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी को मासूम के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।

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