अपराध रोकने की खातिर बरसों से पुलिस को है इस टोटके पर भरोसा!
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अपराध और अपराधियों से जूझने वाली पुलिस भी शुभ-अशुभ के फेर में रहती है। नए साल के पहले दिन हर थाने में पहली अपराध संख्या पर गुडवर्क ही दर्ज होता है, ताकि पूरे साल सब अच्छा ही अच्छा रहे। बरसों पुराने इस टोटके से पुलिस खुद को जुदा नहीं कर पा रही है। 2016 में भी इसी मंशा से पुलिस ने नए साल का आगाज किया है।
वैज्ञानिक युग में बरसों पुरानी धारणाएं बरकरार हैं। एक जनवरी को हर वर्ष पुलिस गुड वर्क दर्ज करने की रिवायत निभा रही है। पुलिस पहली संख्या पर किसी तरह का अपराध दर्ज नहीं करती है।
माना जाता है कि यदि पहले अपराध संख्या पर कोई घटना दर्ज होती है तो साल भर तक ऐसे अपराधों से ही जूझना पडे़गा। यही वजह है कि हर थाना पुलिस का पहला अपराध संख्या पर गुडवर्क ही दर्ज होता है। गुडवर्क यानि तमंचा, खुखरी, चाकू, नशीले पदार्थ और शराब की बरामद करना होता है।
एक दिन पहले ही इसके लिए पुलिस कर लेती है तैयारी
बाकायदा इसके लिए एक दिन पहले ही ताना-ताना बुन लिया जाता है। इस साल भी पुलिस उस टोटके से अछूती नहीं रह पाई है। हर थाने से गुडवर्क की बौछार हुई है। नेहरू कॉलोनी की जोगीवाला पुलिस ने अरविंद, धन सिंह और चंदन निवासी नत्थनपुर को जुआ खेलते हुए दबोचा है।
डालनवाला की करनपुर और शहर कोतवाली की लक्खीबाग पुलिस ने शराब बरामदगी के साथ अपराध पंजिका का शुभारंभ किया। पटेलनगर, राजपुर, रायवाला और सहसपुर पुलिस ने चरस और अफीम बरामद की है। हालांकि पुलिस अधिकारी इस टोटके के बारे में जानकारी होने से बचते रहे।
जानिए, क्या होती है अपराध संख्या
पुलिस शिकायतकर्ता की प्रार्थना पत्र को जिस डायरी में दर्ज करती है उसकी हर साल एक से संख्या शुरू होती है, जिसे पुलिस विभाग में अपराध संख्या (क्राइम नंबर) कहते हैं। मसलन वर्ष 2016 की शुरूआत अपराध संख्या 1/16 से सभी थानों में डायरी भरी जाएगी।
अपराध संख्या दो पर हत्या का मुकदमा
नए साल पर जिले भर में प्रेमनगर को
छोड़कर तमाम थानों में गुडवर्क ही गुडवर्क रहे। केहरी गांव में अर्जुन की
हत्या का मुकदमा अपराध संख्या दो पर दर्ज हुआ है, जबकि एक पर पहले ही पुलिस
ने 110 ग्राम चरस बरामदगी दर्ज कर ली थी।