श्रीनगर: भूख हड़ताल पर बैठे अनशनकारियों को पुलिस ने जबरन उठाया, अस्पताल में भर्ती
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने तथा ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ की मांग को लेकर सात दिसंबर से भूख हड़ताल पर बैठे राइट टू इंप्लॉयमेंट एंड हेल्थ के पांच आंदोलनकारियों को सोमवार तड़के साढ़े चार बजे प्रशासन की टीम ने अनशन स्थल से जबरन उठाकर सीएचसी गैरसैंण में भर्ती करा दिया।
इनमें से चार आंदोलनकारियों को श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इन्होंने पुलिस-प्रशासन को खूब छकाया। अनशनकारी अस्पताल से निकलकर बाजार में अनशन पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती करा दिया।
देर शाम चारों को बेस अस्पताल से भी हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। आंदोलनकारियों कोे जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की प्रशासन की कार्रवाई का लोगों ने खूब विरोध किया तथा सरकार का पुतला भी फूंका।
सोमवार सुबह उपजिलाधिकारी स्मृता परमार के नेतृत्व में पांचों आमरण अनशनकारियों को जबरन उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण में भर्ती करवा दिया गया। इनमें से दो आंदोलनकारियों रामकृष्ण तिवारी (76) तथा महेश चंद्र पांडे (60) को हालत बिगड़ने पर बेस अस्पताल श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया, जबकि त्रिलोक सिंह को छुट्टी दे दी गई। आंदोलनकारी प्रवीण सिंह (35) तथा विनोद जुगलान (52) को भी करीब साढ़े 6 बजे श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर कर दिया गया।
आंदोलनकारियों को जबरन उठाने और रेफर करने की भनक लगते ही लोग गैरसैंण चौराहे पर जमा हो गए। महिला कांग्रेस की कृष्णा नेगी, राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और मनीष सुंदरियाल एंबुलेंस के आगे लेट गए। ऐसे में पुलिस और एसडीएम स्मृता परमार ने आंदोलनकारियों को हटाया।
विरोध में आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन और सरकार का पुतला फूंका। उन्होंने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि मंगलवार से रामलीला मैदान में सुबह दस से शाम चार बजे तक क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।
इसके लिए व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट को संघर्ष समिति का अध्यक्ष, सुरेंद्र सिंह रावत को उपाध्यक्ष, विरेन्द्र आर्य को सचिव बनाया गया है। वहीं, महिला मोर्चा अध्यक्ष कृष्णा नेगी, युवा मोर्चा अध्यक्ष लक्ष्मण खत्री को भी समिति में शामिल कियागया है। प्रदर्शन करने वालों में संजय बुड़ाकोटी, सत्यपाल नेगी, गुरिल्ला संगठन के अध्यक्ष रणजीत शाह, विरेंद्र प्रधान, पुष्कर सिंह रावत समेत कई लोग मौजूद थे।
उधर, बेस अस्पताल श्रीनगर में रेफर किए गए अनशनकारी प्रवीण सिंह, विनोद जुगलान, रामकृष्ण तिवारी और महेश चंद्र पांडे ने पुलिस प्रशासन को खूब छकाया। चारों अस्पताल से चुपचाप निकलकर बाजार में हेमवती नंदन बहुगुणा की मूर्ति के सामने अनशन पर बैठ गए।
अस्पताल में भारी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। अस्पताल गेट पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन अनशनकारी यहां से कार से सीधे बाजार पहुंच गए। अनशनकारियों के बेस अस्पताल से निकलने की सूचना पर पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए।
बाद में पुलिस ने बलपूर्वक सभी अनशनकारियों को फिर बेस अस्पताल में भर्ती करा दिया। चारों को करीब 10 बजे बेस अस्पताल में लाया गया था। यहां चिकित्सकों ने सभी अनशनकारियों की स्थिति को सामान्य बताते हुए उन्हें भर्ती कर लिया।
इस बीच, अनशनकारियों को भर्ती किए जाने की सूचना पर क्षेत्र के सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे। गढ़वाल विवि के छात्रों ने भी अनशनकारियों के समर्थन में सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अनशनकारियों के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों में संजय घिल्डियाल, अतुल सती, शिवनी पांडे, देवकांत देवराड़ी, नीरज रेम्स आदि शामिल थे। गैरसैंण अंादोलनकारियों को प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी सहित कई अन्य लोगों ने अस्पताल पहुंचकर समर्थन दिया। स्वामी ने कहा कि वह गैरसैंण राजधानी बनाने के लिए हर संभव सहयोग करेंगे।
आंदोलनकारियों को बेस अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश मिले हैं। अस्पताल में शांति व्यवस्था बनी रहे, इसलिए पुलिस तैनात की गई है।
-मायादत्त जोशी, एसडीएम श्रीनगर।