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PMO पहुंचा उत्तराखंड में बाघों के शिकार का मामला, हो सकती है CBI जांच

Thu, 20 Apr 2017 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 20 Apr 2017 12:37 AM IST
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PMO received application of Tiger Hunt Case in Uttarakhand

जिम कार्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क में बाघ जैसे दुर्लभ प्रजाति के जंगली जीवों के शिकार किए जाने का मामला पीएमओ तक पहुंच गया है। आपरेशन आई आंफ द टाइगर के मुख्य पदाधिकारी एवं उत्तराखंड राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य राजीव मेहता ने वन्य जीवों की सुरक्षा में गंभीर शिथिलता बरतने का आरोप लगाने हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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इतना ही सलाहकार बोर्ड सदस्य ने प्रकरण से वन एवं पर्यावरण मंत्री को अवगत कराते हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड सदस्य का आरोप है कि एसटीएफ की कार्रवाई में गिरफ्तार शिकारियों के बयानों पर गौर फरमाएं तो अकेले कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही पिछले तीन साल के भीतर 20 से 25 बाघों का शिकार ह़ुआ है।
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15 मई 2016 को एसटीएफ टीम ने रायवाला के पास बाघ की खाल के साथ चार आरोपी शिकारियों को गिरफ्तार किया था। नेशनल टाइगर डाटा बेस के मिलान और भारतीय वन्य जीव संस्थान की जांच में पता चला कि बरामद की गई छह खाल में से चार खाले कार्बेट टाइगर रिजर्व के बाघों की है। 

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सात खाले बरामद

PMO received application of Tiger Hunt Case in Uttarakhand

पीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट में सलाहकार बोर्ड सदस्य मेहता का कहना है कि साल 2014 में बाघ और गुलदार की आठ, 2014 में दस, 2016 में 20 और फरवरी 2017 तक सात खाले बरामद की गई है।

विभागीय अफसरों पर आरोप है कि वे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने के बजाए उसे दबाने का प्रयास करते हैं जो गंभीर बात है। बाघों के शिकार के मामले में देश के अन्य राज्यों में संबंधित अफसरों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई होती है लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नही हेा रहा है जो दुखद पहलू है।

पीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट में प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई। बाघों के शिकार से संबंधित रिपोर्ट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अलावा नेशनल टाइगर कंर्जेशन अथॉरिटी आफ इंडिया को भी भेजी गई है। 

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