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PM मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को समय से पूरा करना बड़ी चुनौती

Tue, 31 Oct 2017 11:14 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 31 Oct 2017 11:14 AM IST
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pm modi this dream project become challenge
इस इम्तेहान में पास हुए तो ईनाम तय

केदारनाथ में पुनर्निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संजीदगी राज्य सरकार की धड़कनें बढ़ा रही है। यहां आपदा के बाद तीन साल में जो काम हुए हैं, उसके तीन गुने काम अब मात्र एक साल में होने हैं।

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ऊपर से इस एक साल में बर्फबारी, यात्रा सीजन और बारिश की बाधा अलग से दिक्कतें पैदा करेंगी। अगर इस इम्तेहान में पास हुए तो ईनाम तय है, मगर फेल होने की स्थिति में अंजाम सभी को पता है। बीते दिनों महज शिलान्यास पत्थरों पर हुई गलती के चलते मुख्य सचिव का एक झटके में हटना इसकी बानगी दे चुका है।
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वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ में पुनर्निर्माण का काम आपदा प्रबंधन विभाग ने किया था। इसमें नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया था। पुनर्निर्माण के तहत लगभग डेढ़ सौ करोड़ का कार्य किया गया था, जिसमें एडीबी, वर्ल्ड बैंक के अलावा केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने पैसा खर्च किया था।
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अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में करीब तीन साल तक सारा काम हुआ, जिसकी काफी तारीफ भी हुई। इधर जिंदल स्टील की ओर से लगभग सौ करोड़ की राशि से दोबारा पुनर्निर्माण कार्यों का एक प्रजेंटेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया।

पीएम ने अपने स्तर से कराए कई संशोधन

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अक्तूबर-18 तक कार्यों को संपन्न करने का लक्ष्य
बताते हैं कि पीएम ने इसकी प्रसंशा करने के साथ ही अपने स्तर से कई संशोधन भी कराए। इसके बाद यहां शंकराचार्य का समाधि स्थल, सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के घाट, एप्रोच रोड को चौड़ी करना, लेजर शो, योग के लिए गुफाएं आदि मिलाकर पंद्रह से ज्यादा बड़े काम होने की बात तय हुई है। इस पर कुल पांच सौ करोड़ रुपये का खर्च होना है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार को जुटाना है।

प्रधानमंत्री की ओर से अक्तूबर-18 तक इन कार्यों को संपन्न करने का लक्ष्य दे दिया गया है। जानकारों की मानें तो आपदा के बाद जो काम तीन वर्षों में हुए हैं, उसे महज एक साल में खत्म करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इन कामों के लिए एमआई-26 हेलीकॉप्टर से लगभग पंद्रह जेसीबी मशीनों को यहां पहुंचाया जाना है। इसके अतिरिक्त पांच सौ श्रमिकों को लगातार यहां रखने का इंतजाम करना भी बेहद चुनौती भरा है।

इसके अतिरिक्त उच्च स्तरीय स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और एक्सपर्ट की टीम भी यहां लगातार रोककर रखनी होगी। यह सब उस वक्त होना है, जब अगले महीने तक केदारपुरी बर्फ से ढंक जाएगी। उसके बाद यात्रा सीजन आरंभ होगा और फिर बारिश की मार। कुल मिलाकर लगभग पूरा साल ही निर्माण कार्यों के लिहाज से दुश्वारी भरा है।

विशेषज्ञ अफसर की नियुक्ति बेहद जरूरी
केदारपुरी में होने वाले कामों को लेकर विशेषज्ञ अफसरों की दरकार है। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बीच यहां काम करना कतई आसान नहीं है। ऊपर से जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारपुरी में होने वाले कामकाज की जानकारी ले रहे हैं, उससे सारा काम तय लक्ष्य में किए जाने का भारी दबाव है। यदि सबकुछ अच्छा रहा तो आगामी लोकसभा चुनावों में इसका लाभ भाजपा के खाते में जाना तय है, और अगर कहीं बात नहीं बनती तो विपक्ष के हाथ एक बड़ा मुद्दा लगना तय है।
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