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मंत्री जी पहाड़ चढ़ने से हमें बचा लीजिए ना...
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Jul 2013 04:25 PM IST
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आपदा की घड़ी में स्वास्थ्य महानिदेशालय में अधिकारी बने डाक्टरों की लंबी चौड़ी फौज पहाड़ न चढऩे की लत नहीं छोड़ पाई।
खुद को विभागीय हाकिमों के सामने कंट्रोल रूम में हाजिर रख आपदा में स्वास्थ्य के जोरदार प्रबंधन की रिपोर्ट देने में यह अधिकारी डाक्टर जुटे रहे। पहाड़ी फोबिया से ग्रस्त अधिकारी डाक्टरों ने सब कुछ केंद्र से आई टीमों के भरोसे छोड़े रखा।
मानो आपदा राज्य में नहीं बल्कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर आई हो। अपनी काबलियत हर शाम की रिपोर्ट भेजकर दिखाते रहे कि केंद्र से आई क्लोरीन की लाखों गोलियां, टनों ब्लीचिंग, डाक्टर और दवाएं कहां पहुंचा दिए।
जिला मुख्यालयों पर बैठे चिकित्सा अधिकारी भी अपने वरिष्ठों के कंट्रोल रूम तक सीमित रहने से सहज महसूस कर रहे थे। सब कुछ ठीक है की रिपोर्ट भेजने का सिलसिला तक चला रहा जब तक प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया से तीन मौतें नहीं हुई।
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दूषित पानी से हुई मौत से हाकिम भी समझे कि आखिर टनों ब्लीचिंग व क्लोरीन की गोलियां कहां पहुंच पाई हैं। हाकिम भी चेते उन्होंने कंट्रोल रूम में अधिकारियों के जमावड़े को जमकर खरी खरी सुनाई।
दो बड़े डाक्टर अधिकारियों को पहाड़ पर चढ़ाया तो बाकि डाक्टर अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए कि हाकिम के रोटेशन पर भेजने के फरमान में कहीं अगला नंबर उनका न आ जाए। ऐसे में अब कुछ डाक्टर अधिकारी विभागीय मंत्री से अपना नंबर आने से रोकने की जुगत भिड़ा रहे हैं।
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खुद को विभागीय हाकिमों के सामने कंट्रोल रूम में हाजिर रख आपदा में स्वास्थ्य के जोरदार प्रबंधन की रिपोर्ट देने में यह अधिकारी डाक्टर जुटे रहे। पहाड़ी फोबिया से ग्रस्त अधिकारी डाक्टरों ने सब कुछ केंद्र से आई टीमों के भरोसे छोड़े रखा।
मानो आपदा राज्य में नहीं बल्कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर आई हो। अपनी काबलियत हर शाम की रिपोर्ट भेजकर दिखाते रहे कि केंद्र से आई क्लोरीन की लाखों गोलियां, टनों ब्लीचिंग, डाक्टर और दवाएं कहां पहुंचा दिए।
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जिला मुख्यालयों पर बैठे चिकित्सा अधिकारी भी अपने वरिष्ठों के कंट्रोल रूम तक सीमित रहने से सहज महसूस कर रहे थे। सब कुछ ठीक है की रिपोर्ट भेजने का सिलसिला तक चला रहा जब तक प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया से तीन मौतें नहीं हुई।
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दूषित पानी से हुई मौत से हाकिम भी समझे कि आखिर टनों ब्लीचिंग व क्लोरीन की गोलियां कहां पहुंच पाई हैं। हाकिम भी चेते उन्होंने कंट्रोल रूम में अधिकारियों के जमावड़े को जमकर खरी खरी सुनाई।
दो बड़े डाक्टर अधिकारियों को पहाड़ पर चढ़ाया तो बाकि डाक्टर अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए कि हाकिम के रोटेशन पर भेजने के फरमान में कहीं अगला नंबर उनका न आ जाए। ऐसे में अब कुछ डाक्टर अधिकारी विभागीय मंत्री से अपना नंबर आने से रोकने की जुगत भिड़ा रहे हैं।