{"_id":"666b642d6679a26e2e028217","slug":"plants-were-bought-from-himachal-and-jammu-and-kashmir-at-dehradun-news-c-5-1-drn1030-434263-2024-06-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: उद्यान घोटाला... हिमाचल और जम्मू कश्मीर से कई गुना अधिक दामों पर खरीदे गए पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: उद्यान घोटाला... हिमाचल और जम्मू कश्मीर से कई गुना अधिक दामों पर खरीदे गए पौधे
Fri, 14 Jun 2024 11:46 AM IST
देहरादून ब्यूरो
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2024 11:46 AM IST
सार
सेब के पौधों को दूसरी नर्सरी फर्मों के प्रस्तावित दामों से डेढ़ से तीन गुना दामों पर खरीदा गया। मनमर्जी से नर्सरियों को सब्सिडी भी करोड़ों रुपये की जारी की गई।
विज्ञापन
मीटिंग ( फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व निदेशक के इशारों पर अधिकारियों ने जालसाजी करते हुए इस घोटाले में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जहां चाहा वहां पर अपनी मर्जी से दाम बढ़ाते हुए खुद को लाभ और सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। पूर्व निदेशक के इशारों पर फलदार पौधों के दाम अपनी मर्जी से संशोधित किए गए। ये दाम पड़ोसी राज्यों से कई गुना अधिक थे।
विज्ञापन
संशोधित दामों में 40 से 150 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई। यही नहीं सेब के पौधों को दूसरी नर्सरी फर्मों के प्रस्तावित दामों से डेढ़ से तीन गुना दामों पर खरीदा गया। मनमर्जी से नर्सरियों को सब्सिडी भी करोड़ों रुपये की जारी की गई।
विज्ञापन
सीबीआई जांच में सामने आया है कि उद्यान विभाग ने कीवी के पौधों के दामों को मई 2021 में 35 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया। जबकि, कलम वाले कीवी के पौधों के दाम 75 से 175 रुपये कर दिए गए। ताकि, इन पर सब्सिडी का खेल किया जा सके। इसके बाद फिर से दिसंबर में दामों को संशोधित किया गया।
विज्ञापन
नर्सरियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया
इस बार कीवी के पौधों के दाम 75 से 225 रुपये कर दिए गए। जबकि, कलम वाले कीवी के पौधों के दामों को 175 रुपये से बढ़ाकर 275 रुपये कर दिया गया। जांच में सामने आया कि ये दाम पड़ोसी राज्यों हिमाचल और जम्मू कश्मीर से कई गुना अधिक हैं। ऐसा इसलिए किया गया कि नर्सरियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया जा सके। इसका बड़ा हिस्सा इन अधिकारियों की जेब में भी आया।
इसी तरह सेब के पौधों की दर 480 रुपये फिक्स कर दी गई। यह दर भी दोनों राज्यों से कहीं अधिक थी। जब इस बात पर सवाल उठे तो पूर्व निदेशक ने अपने चहेते अधिकारियों से ही इसकी जांच कराई, जिसमें कोई निर्णय नहीं आया। सेब के पौधों के लिए पाल नर्सरी नाम की फर्म ने 300 रुपये प्रति पौधा की दर प्रस्तावित की थी। लेकिन, पूर्व निदेशक और उनके चहेते अधिकारियों ने मनमर्जी से सेब के पौधे जम्मू कश्मीर की बरकत एग्रो से 465 रुपये प्रति पौधे की दर से खरीदे गए। इस फर्म से कुल 183625 सेब के क्लोन रूट पौधे खरीदे गए, जिसके लिए उसे 8.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
ये भी पढ़ें...उफ...ये गर्मी: जून में 121 साल बाद 42 डिग्री पार पहुंचा देहरादून का तापमान, अगले दो दिन भी राहत के आसार नहीं
150 के पौधे को 465 में खरीदा
सेब के उन पौधों को खरीदने में भी तमाम अनियमितताएं हुई जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इन पौधों पर फेदर नहीं था उनकी दर 150 रुपये निर्धारित की गई थी। यह दर उद्यान निदेशालय ने ही ऐसे पौधों के लिए निर्धारित की थी। जबकि, पूर्व निदेशक के इशारे पर बरकत एग्रो से 2.55 करोड़ रुपये में 1.09 लाख रुपये ऐसे पौधे खरीदे गए। इनकी दर करीब तीन गुना 465 रुपये चुकाई गई। यही नहीं इस जैसी कई फर्म को नियमों को ताक पर रखकर भुगतान भी किया गया।I
इस बार कीवी के पौधों के दाम 75 से 225 रुपये कर दिए गए। जबकि, कलम वाले कीवी के पौधों के दामों को 175 रुपये से बढ़ाकर 275 रुपये कर दिया गया। जांच में सामने आया कि ये दाम पड़ोसी राज्यों हिमाचल और जम्मू कश्मीर से कई गुना अधिक हैं। ऐसा इसलिए किया गया कि नर्सरियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया जा सके। इसका बड़ा हिस्सा इन अधिकारियों की जेब में भी आया।
इसी तरह सेब के पौधों की दर 480 रुपये फिक्स कर दी गई। यह दर भी दोनों राज्यों से कहीं अधिक थी। जब इस बात पर सवाल उठे तो पूर्व निदेशक ने अपने चहेते अधिकारियों से ही इसकी जांच कराई, जिसमें कोई निर्णय नहीं आया। सेब के पौधों के लिए पाल नर्सरी नाम की फर्म ने 300 रुपये प्रति पौधा की दर प्रस्तावित की थी। लेकिन, पूर्व निदेशक और उनके चहेते अधिकारियों ने मनमर्जी से सेब के पौधे जम्मू कश्मीर की बरकत एग्रो से 465 रुपये प्रति पौधे की दर से खरीदे गए। इस फर्म से कुल 183625 सेब के क्लोन रूट पौधे खरीदे गए, जिसके लिए उसे 8.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
ये भी पढ़ें...उफ...ये गर्मी: जून में 121 साल बाद 42 डिग्री पार पहुंचा देहरादून का तापमान, अगले दो दिन भी राहत के आसार नहीं
150 के पौधे को 465 में खरीदा
सेब के उन पौधों को खरीदने में भी तमाम अनियमितताएं हुई जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इन पौधों पर फेदर नहीं था उनकी दर 150 रुपये निर्धारित की गई थी। यह दर उद्यान निदेशालय ने ही ऐसे पौधों के लिए निर्धारित की थी। जबकि, पूर्व निदेशक के इशारे पर बरकत एग्रो से 2.55 करोड़ रुपये में 1.09 लाख रुपये ऐसे पौधे खरीदे गए। इनकी दर करीब तीन गुना 465 रुपये चुकाई गई। यही नहीं इस जैसी कई फर्म को नियमों को ताक पर रखकर भुगतान भी किया गया।I