{"_id":"a78a283191d48619d0126f5b46f1d66d","slug":"pharmacists-strike-big-problem-in-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून में दवाएं नहीं मिलीं, खाली हाथ लौटे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दून में दवाएं नहीं मिलीं, खाली हाथ लौटे मरीज
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 29 Oct 2013 09:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में फार्मासिस्टों का कार्य बहिष्कार का समय बदलना रोगियों के लिए मुसीबत हो गया है। ओपीडी में आए बहुत कम रोगियों को दवाएं मिल पाईं।
विज्ञापन
इस कारण कई रोगी नियमित दवा काउंटर के पास भटक रहे हैं। राजधानी देहरादून में टिहरी, सहारनपुर से आए कुछ रोगी इस आस में बहुत देर तक बैठे रहे कि शायद काउंटर खुल जाए। इसके बाद जिन रोगियों के पास पैसा था, उनने बाहर मेडिकल स्टोरों से दवाएं लीं और घर गए।
विज्ञापन
दवा काउंटर बंद
फार्मासिस्ट सुबह आठ बजे से 11 बजे तक दवा काउंटर खोले बैठे थे। डॉक्टर ओपीडी में सुबह 10 बजे के बाद बैठे। कुछ डॉक्टर पहले वार्डों में राउंड लेने चले गए। डॉक्टरों से चेक अप कराने के बाद जब मरीज बाहर निकले तो दवा काउंटर बंद हो गए थे।
विज्ञापन
टिहरी के राम स्वरूप रावत, सहारनपुर के रिटायर्ड शिक्षक विनोद गुप्ता दवाओं के लिए परेशान भटकते रहे। टीएचडीसी की प्रिया, डागरा बाजार के विशंभर कुमार दवाओं के लिए परेशान रहे।
सुबह आठ से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार
दून अस्पताल में दवाओं के लिए भटक रहीं। शकुंतला (65) इन्दिरा कालोनी से आईं थीं। उनकी सांस में तकलीफ थी। प्रेमनगर की मिम्मी देवी (62) के सीने में दर्द था।
दवा काउंटर के सामने बैठी हांफती रहीं। सहस्त्रधारा रोड की रहने वाली साबरा (52) के हाथ-पांव में बहुत तकलीफ थी। लक्ष्मण चौक के रहने वाले नंदलाल जायसवाल की मां बेटे को धूप मे लिटाकर काउंटर के पास खड़ी रहीं।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बीपी थपलियाल का कहना था कि सुबह आठ से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार के बाद फार्मासिस्टों को काम करना पड़ता था जिससे वे महानिदेशालय के धरने पर नहीं पहुंच पाते थे। इससे कार्य बहिष्कार का समय बदला है।
फार्मासिस्टों का कार्य बहिष्कार का समय बदला जाना आम आदमी के लिए मुसीबत बन गया है। इससे गिनती के रोगियों को दवाएं मिल पाईं।