गोरखालैंड के लिए उत्तराखंड में हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे लोग
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अलग प्रदेश गोरखालैंड की मांग को लेकर गोरखाली सुधार सभा के बैनर तले हजारों लोगों ने रैली निकाली। लेफ्टिनेंट जनरल शक्ति गुरुंग (अप्र) के नेतृत्व में निकाली गई रैली में प्रतिभागियों ने कहा कि गोरखालैंड के निर्माण होने तक वे चैन की सांस नहीं लेंगे।
इससे पहले गोरखाली समुदाय के लोग बड़ी संख्या में परेड मैदान में एकत्र हुए। बैनर व पट्टियां लिए युवाओं, किशोरों, बुजुर्गों और महिलाओं की जुबान पर बस गोरखालैंड का नाम था। रैली शाम पांच बजे गांधी पार्क पहुंची। यहां लेफ्टिनेंट जनरल (अप्र) शक्ति गुरुंग ने सभा को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि हम सबसे पहले भारतीय हैं। भारत के निर्माण और इसकी एकता में गोरखाली समाज का बड़ा योगदान है। भारतीय गोरखा हमारी सबसे महत्वपूर्ण पहचान है। हमें अपना गोरखालैंड चाहिए। यह मांग सौ साल से अधिक पुरानी है।
इसके बावजूद सत्ता प्रतिष्ठान के स्तर पर हमारी पहचान पर सवाल खड़ा किया जाता रहा है। सरकारी नौकरियों, जाति प्रमाण-पत्र समेत तमाम कार्यों के लिए हमें बाधाएं झेलनी पड़ती हैं। इससे समुदाय में कुंठा और निराशा बढ़ रही है।
भारत सरकार के पूर्व मिलिट्री सेक्रेटरी जनरल शक्ति गुरुंग ने कहा कि गोरखाली राष्ट्र के अभिन्न अंग हैं। हम सिर्फ अलग राज्य की मांग कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोरखाली बच्चों पर बंग्ला भाषा लादने की कोशिश कर रही हैं।
वहां मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है। उत्तराखंड में 15 लाख से अधिक गोरखाली निवास करते हैं। हम हर हाल में संघर्ष को तेज करेंगे। अब गोरखाली समाज खामोश नहीं बैठेगा और गोरखालैंड की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगा। कई संगठनों व गणमान्य गोरखालियों ने रैली को सफल बनाने में सहयोग दिया। गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष कर्नल भगवान सिंह क्षेत्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मर्यादित रैली देखकर सुरक्षाकर्मी भी हैरान
रैली में शामिल सभी लोग जोश और उत्साह से लबरेज थे। बुजुर्ग, युवा, प्रौढ़, किशोर सभी खूब उत्साहित थे। परेड मैदान से गांधी पार्क तक भारत माता की जय, सबसे प्यारा हिंदुस्तान हमारा के नारों के साथ हर हाल में लेकर रहेंगे गोरखालैंड समेत खूब नारे लगे।
लोगों ने जय मां काली, आया गोरखाली, हमरो प्यारो गोरखालैंड, हमरौ पहचान गोरखा... आदि के नारे लगाए।
गोरखाली सुधार सभा के बैनर तले हजारों लोग रैली में जुटे, लेकिन रैली पूरी तरह अनुशासित रही। रैली की शुरुआत में दो पंक्तियां बना दी गईं थीं।
लेफ्टिनेंट जनरल शक्ति गुरुंग खुद सभी को निर्देशित कर रहे थे। रिटायर्ड सैन्य अफसरों ने भी रैली को अनुशासित करने में भरपूर सहयोग दिया। इतनी अनुशासित और मर्यादित रैली देखकर सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए।