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उत्तराखंड में बना 'पेरिस समझौते' का फार्मूला, दून में मिला था अप्रूवल

Tue, 04 Oct 2016 06:39 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 04 Oct 2016 06:39 PM IST
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paris climate agreement formed and approved in dehradun.
Paris deal - फोटो : twitter
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जलवायु न्याय’ के जिस फार्मूले को दुनिया के 62 देशों ने स्वीकार कर लिया, उस पेरिस समझौते के लिए भारतीय प्रस्ताव का खाका न केवल देहरादून में तैयार किया गया बल्कि संयोग से इसका अनुमोदन भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देहरादून प्रवास के दौरान 28 सितंबर को राजपुर रोड स्थित कैंप ‘आशियाना’ में किया।
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paris climate agreement formed and approved in dehradun.
syed akbaruddin

संयुक्त राष्ट्र में भारत समेत 62 देशों ने अपने राष्ट्राध्यक्षों से प्रस्ताव अनुमोदित करा कर जमा कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरउद्दीन ने पेरिस समझौते के तहत जलवायु परिवर्तन का प्रस्ताव गांधी जयंती के मौके पर दो अक्तूबर की शाम को जमा किया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Getty Images
इस प्रस्ताव में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई), देहरादून ने कई नीतियां तैयार कीं। सबसे अहम जलवायु न्याय की अवधारणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। इस अवधारणा के तहत यह कहा गया है कि विकसित देशों ने पर्याप्त कार्बन उत्सर्जित कर दिया है।
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paris agreement - फोटो : paris agreement
लिहाजा अब विकसित देश कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण करें और कार्बन उत्सर्जन की जो गुंजाइश बची है उसमें विकासशील देशों को मौका दिया जाए। बता दें कि औद्योगिक विकास कार्यों से कार्बन उत्सर्जित होता है।

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Paris deal - फोटो : twitter
अगर कार्बन उत्सर्जन रोकने के नाम पर विकासशील देशों में औद्योगिक कार्य बंद हुए तो वे और पिछड़ जाएंगे। विश्व का तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए 790 बिलियन टन कार्बन का बजट का मानक रखा गया है।

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India To Ratify Paris Climate Agreement On October 2: PM Modi - फोटो : demo
इसमें 515 बिलियन टन हिस्सा विकासशील देश इस्तेमाल कर चुके हैं। जलवायु न्याय के तहत 275 बिलियन टन कार्बन स्पेस बचा है उसमें विकासशील देशों को मौका दिए जाने के लिए कहा गया है। पेरिस समझौते पर 170 देशों ने संधि की थी, इनमें 62 देशों ने इसे अनुमोदित करा कर जमा कर दिए हैं।

paris climate agreement formed and approved in dehradun.
president pranab mukherjee in dehradun
किसी समझौते पर पहले संधि होती है। इसके बाद मामला कैबिनेट में रखा जाता है। इसके पास होने पर राष्ट्राध्यक्ष अनुमोदित करता है। पेरिस समझौते में सबसे अहम बिंदु जलवायु न्याय का है। इसे 62 देशों ने मान लिया है। कुछ विकसित देश इस बिंदु से अनमने थे, लेकिन हम इसे बोर्ड में रखने पर सफल रहे।
- डॉ. वीआरएस रावत, वरिष्ठ विज्ञानी, आईसीएफआरई
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