उत्तराखंड: मरीज को कंधे पर लेकर छह किलोमीटर चढ़ी खड़ी चढ़ाई, अस्पताल ले जाने को तब मिला वाहन
- साहिया के बिजनु गांव के लोगों ने डांडी-कंडी का सहारा
- अभी तक सड़क सुविधा नहीं जुड़ा है गांव
विस्तार
उत्तराखंड के साहिया गांव में सड़क सुविधा न होने से कारण गुरुवार को बिजनू गांव के बिजनाड़ अनुसूचित जाति बस्ती में रहने वाले एक युवक की जान पर बन आई। परिजनों ने कंबल और बांस के डंडों के सहारे तैयार की गई डांडी-कंडी के सहारे युवक को करीब छह किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़ मुख्य सड़क तक लाया। जिसके बाद निजी वाहन से उसे नजदीकी पीएचसी क्वांसी में भर्ती कराया गया। जहां वर्तमान में उसका उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार टिंकू(36) पुत्र वीरू की बुधवार की देर रात अचानक तबीयत खराब हो गई। उसे हल्के बुखार के साथ उल्टी-दस्त होने लगे। जिससे टिंकु की हालत खराब हो गई। सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों ने युवक को डांडी-कंडी के सहारे अस्पताल तक पहुंचाने का निर्णय लिया। करीब छह किमी का पैदल सफर तय करने के बाद ग्रामीण मुख्य सड़क तक पहुंच सके। जिसके बाद युवक को प्राइवेट वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया।
ग्राम प्रधान पूनम और बीडीसी सदस्य लक्ष्मी देवी का कहना है कि गांव तक सड़क सुविधा पहुंचाने को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया जा चुका है। लेकिन हर बार उन्हें कोरा आश्वासन मिलता है। गांव सड़क सुविधा के लिए जरूरी सभी मानकों को पूरा करता है बावजूद गांव तक सड़क नहीं पहुंचाई जा रही है। हर बार किसी की तबीयत खराब होने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए डांडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है।
इस दौरान उसकी जान जोखिम भरी रहती है। सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान होती है। व्यापार मंडल अध्यक्ष क्वासी सूर्यपाल चौहान, ग्रामीण नरेन्द्र, सोनू शैलेंद्र, गोविंद आदि का कहना है कि सरकार हर गांव तक सड़क पहुंचाने के बड़े बड़े दावे करती है लेकिन क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क विहीन है।
लोनिवि चकराता के अधिशासी अभियंता बीसी पंत ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से लिखित प्रस्ताव मिलने पर गांव को सड़क सुविधा पहुंचाने के लिए शासन स्तर पर विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। जिसके बाद गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।