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उत्तराखंड: खामोशी को बनाया ताकत, निशाने से रचा इतिहास, अभिनव देशवाल ने शूटिंग में हासिल की अंतरराष्ट्रीय पहचान
Wed, 02 Sep 2026 11:48 AM IST
Renu Saklani
करन सिंह दयाल, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
करन सिंह दयाल, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:48 AM IST
सार
महज 19 साल की उम्र में उत्तराखंड के पैरा शूटर अभिनव देशवाल ने अपनी चुनौती को ताकत बनाकर निशानेबाजी में खास पहचान बनाई है।
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अभिनव देशवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पैरा शूटर अभिनव देशवाल ने अपनी खामोशी को ऐसी ताकत बनाया कि अब वह अपने अचूके निशाने से इतिहास लिख रहे हैं। 19 वर्षीय अभिनव की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह बोल और सुन नहीं सकते। इसके बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया।
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शांत स्वभाव और अटूट आत्मविश्वास के साथ उन्होंने निशानेबाजी में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। अभिनव के पिता मनोज देशवाल पेशे से शिक्षक हैं। उन्हाेंने कहा कि परिवार का नाम रोशन करने के साथ अभिनव ने उन तमाम खिलाड़ियों को संदेश दिया है जो किसी न किसी चुनौती के बावजूद खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। अभिनव ने साबित किया है कि सफलता के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि हौसला और निरंतर मेहनत मायने रखती है।
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मां और बहन बनीं सबसे बड़ी ताकत
अभिनव की सफलता के पीछे उनकी मां संगीता और बहन अंकिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब संवाद की सामान्य राह उनके लिए आसान नहीं थी, तब परिवार ने उनके हौसले को टूटने नहीं दिया। मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया तो बहन अंकिता ने भी शूटिंग के सफर में उन्हें प्रेरित किया। खास बात यह है कि अंकिता स्वयं भी शूटर हैं। भाई-बहन ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए शूटिंग को अपना जुनून बनाया। अभिनव के लिए निशाना लगाना केवल खेल नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का माध्यम भी रहा। उन्होंने लगातार अभ्यास, अनुशासन और एकाग्रता के दम पर राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई।
खामोशी में साधा निशाना, दुनिया में बजाया डंका
शूटिंग ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी को बेहद एकाग्रता, धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। अभिनव ने इन्हीं खूबियों को अपनी ताकत बनाया। मैदान में उतरने के बाद उनका पूरा ध्यान लक्ष्य पर रहता है। संवाद की कमी उनके प्रदर्शन के आड़े नहीं आई। उन्होंने अपने प्रदर्शन से ही जवाब दिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।
ये भी पढे़ं...उत्तराखंड: यशस्वी जोशी के निशाने से चमका देशभूमि का नाम, तीन साल तक रह चुकी है भारतीय टीम का हिस्सा
डेफलम्पिक से लेकर आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप तक जीते पदक
टोक्यो डेफलंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले देश के गौरव ने 2026 में एशियन चैंपियनशिप और जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मूक-बधिर वर्ग में कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके अभिनव ने अब सामान्य वर्ग में भी अपनी धाक जमाते हुए देश का मान बढ़ाया है। अभिनव पिस्टल शूटिंग के तीन इवेंट 10 मीटर एयर पिस्टल, 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल और 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल में अपना हुनर दिखाते हैं।
अभिनव की सफलता के पीछे उनकी मां संगीता और बहन अंकिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब संवाद की सामान्य राह उनके लिए आसान नहीं थी, तब परिवार ने उनके हौसले को टूटने नहीं दिया। मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया तो बहन अंकिता ने भी शूटिंग के सफर में उन्हें प्रेरित किया। खास बात यह है कि अंकिता स्वयं भी शूटर हैं। भाई-बहन ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए शूटिंग को अपना जुनून बनाया। अभिनव के लिए निशाना लगाना केवल खेल नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का माध्यम भी रहा। उन्होंने लगातार अभ्यास, अनुशासन और एकाग्रता के दम पर राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई।
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शूटिंग ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी को बेहद एकाग्रता, धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। अभिनव ने इन्हीं खूबियों को अपनी ताकत बनाया। मैदान में उतरने के बाद उनका पूरा ध्यान लक्ष्य पर रहता है। संवाद की कमी उनके प्रदर्शन के आड़े नहीं आई। उन्होंने अपने प्रदर्शन से ही जवाब दिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।
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