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मछली के शौकीनों को मिलेगा बांग्लादेशी ‘पंगेसियस’ का स्वाद
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 25 Nov 2016 10:37 AM IST
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Pangasius
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मछली के शौकीनों को अब रोहू, कतला, नैन जैसी देशी और कामन कार्प, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प जैसी विदेशी मछलियों के अलावा बांग्लादेशी पंगेसियस मछली का भी स्वाद मिल सकेगा। अब मत्स्यपालन विभाग केंद्र सरकार की मदद से बांग्लादेशी पंगेसियन (पंगास मछली) का उत्पादन करने जा रही है।
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मत्स्यपालन विभाग के अपर सचिव जीबी औली के मुताबिक इस समय राज्य में रोहू, कतला, नैन जैसी देशी और कामन कार्प, ग्रास कार्प और सिल्वर कार्प जैसी विदेशी मछलियों का उत्पादन हो रहा है। लेकिन अब विभाग ने बांग्लादेशी पंगेसियस मछली के उत्पादन की योजना बनाई है, जिसके लिए केंद्र ने राज्य को दो करोड़ का बजट भी जारी कर दिया है।
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पंगेसियस का उत्पादन हो सके इसके लिए खटीमा में ब्रूड बैंक स्थापित किया जा रहा है। अपर सचिव औली के मुताबिक आंध्रप्रदेश, झारखंड, बिहार के बाद उत्तराखंड ऐसा राज्य है जहां पंगेसियस के उत्पादन की योजना तैयार की गई है। पहले चरण में ऊधमसिंहनगर, चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, में इसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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ये है पंगेसियस की विशेषता
पंगेसियस शार्क कैट फिश श्रेणी की मछली है। पंगासाइडे परिवार की यह मछली ताजे पानी में पाई जाती है। बांग्लादेश के अलावा भारत, वर्मा और पाकिस्तान में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा है।
पंगेसियस की सबसे बड़ी विशेषता इसका तेजी से विकसित होना है। विशेषज्ञों की मानें तो महज आठ माह में ही यह दो किग्रा की हो जाती है। अन्य मछलियों की तुलना में इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है।