गजबः देवभूमि में ‘व्हाट्स एप’ से हो रही पंडिताई
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देश-दुनिया में लगातार बढ़ते जा रहे इंटरनेट फीवर से शायद ही कोई चीज अछूती रह गई है। अब इस खुमार से धार्मिक कर्मकांडी पंडित भी पीछे नहीं हैं।
वह ‘व्हाट्स एप’ के जरिये पंडिताई कर रहे हैं। वर्तमान में चल रहे सावन में पंडितजी को ‘व्हाट्स एप’ की उपयोगिता खासी लुभा रही है। सोशल मीडिया में भी ‘व्हाट्स एप’ छाया है।
सावन में आयोजित किए जा रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं महाशिवपुराण कथा में ‘व्हाट्स एप’ का जादू पंडितों के सिर चढ़कर बोल रहा है।
पुराणों के जानकार पंडित त्रिलोकीनाथ शास्त्री कहते हैं कि दरअसल सावन में पार्थिव पूजा, शिव स्तुति के दौरान भगवान शिव के सौ स्वरूपों की गणना या नाम तत्काल याद न आने, पूजा विधि में किसी विशेष कर्मकांड की जानकारी न होने पर ‘व्हाट्स एप’ में एक-दूसरे पूछकर लोग सहायता ले रहे है।
अधिकांश पंडित कर रहे हैं इंटरनेट का प्रयोग
कर्मकांडी पंडित कैलाश जोशी का कहना है कि जब हम किसी नई जानकारी के लिए इंटरनेट या सोशल मीडिया की मदद ले सकते हैं, तो उसका अपने व्यवसाय में इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते।
पंडित बसंतबल्लभ पांडेय के अनुसार वर्तमान में पंडिताई के व्यवसाय में लगे अधिकांश पंडित सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक कारण यह भी
‘व्हाट्स एप’ के जरिये एंड्रायड फोन में फोटो और वीडियो संदेशों का आदान-प्रदान बहुत तेजी से होता है, इसलिए अधिकांश लोग इसे अपना रहे हैं।
मंदिरों में की जाने वाली विशेष पूजा-अर्चना की वीडियो फिल्मों का ‘व्हाट्स एप’ में आसानी से और बहुत जल्द आदान-प्रदान हो जाता है। साथ ही व्हाट्स एप के जरिये सूचना का आदान-प्रदान भी तत्काल हो जाता है।