हरिद्वार: पंचायती अखाड़े में कोठारी पद को लेकर तनाव की स्थिति, अध्यक्ष ने जताई हत्या की आशंका
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कनखल के पंचायती अखाड़ा निर्मला में कोठारी पद के लिए चल रहे विवाद को लेकर दूसरे दिन भी तनाव की स्थिति बनी रही। कोठारी होने का दावा कर रहे गोपाल सिंह शनिवार रात और रविवार को दिनभर अपने समर्थकों के साथ अखाड़े के मुख्य गेट पर ही डटे रहे। वहीं अखाड़े के अंदर खुद को कैद कर चुके काबिज अध्यक्ष ज्ञानदेव सिंह पक्ष ने कोठारी पद के दावे को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन होने की बात कही। तनाव के मद्देनजर अखाड़े के मुख्य गेट पर भारी पुलिस फोर्स और पीएसी डेरा डाले रही।
पिछले साल अखाड़े के कोठारी पद से निष्कासित कर दिए गए गोपाल सिंह शनिवार को अपने समर्थकों के साथ अखाड़े पर पहुंचे लेकिन अखाड़े पर काबिज पक्ष अमरजीत सिंह, जसविंदर आदि ने अखाड़े का मुख्य द्वार बंद कर दिया। मुख्यद्वार बंद होने पर कोठारी होने का दावा कर रहे गोपाल सिंह अपने समर्थकों के साथ ही मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। गोपाल सिंह ने दावा किया उनके कोठारी पद पर बने रहने को लेकर कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है। इसलिए उनके निष्कासन का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने हाईकोर्ट का हवाला देते हुए पदभार ग्रहण करने की मांग की। इधर, हंगामा होने पर प्रशासन पुलिस हरकत में आ गया था। आनन फानन में पुलिस फोर्स एवं पीएसी की तैनाती कर दी गई थी।
दूसरे पक्ष ने दावा किया था कि स्टे फिलहाल प्रभावी नहीं है, पूरा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। देर रात कनखल थाने में प्रशासनिक पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चली वार्ता में भी हल नहीं निकल सका। कोठारी पद दावा कर रहे गोपाल सिंह ने अपने समर्थकों के संग मुख्यद्वार पर ही बिस्तर डालकर रात गुजारी। रविवार को दिनभर भी गोपाल सिंह मुख्यद्वार पर ही डटे रहे। उनका कहना है कि वे हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने की मांग कर रहे हैं, कब्जा लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष ज्ञानदेव सिंह और उनके समर्थकों की ओर से की जा रही गतिविधियों से अखाड़े के अन्य पदाधिकारियों एवं सिख समुदाय केा अवगत करा दिया गया है। एसओ हरिओमराज चौहान ने बताया कि कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
निर्मला अखाड़े के अध्यक्ष ने जताई हत्या की आशंका
श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री ने गोपाल सिंह के आरोपों को नकारते हुए कहा कि षड्यंत्र के तहत दूसरा पक्ष दबाव बनाकर अखाड़े की संपत्ति को कब्जा करना चाहता है। उन्होंने आशंका जताई कि कब्जा करने की नीयत से आए संतों के साथ शामिल असामाजिक तत्व उनकी हत्या भी कर सकते हैं।
उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि बीती रात से संतों के वस्त्र पहनकर अराजकतत्व अखाड़े के गेट पर बैठे हुए हैं। पुलिस प्रशासन उन्हें अब तक नहीं हटा पाया है। जबकि पुलिस के आला अधिकारियों को समय से सूचना दे दी थी।
महंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि उनका स्वास्थ्य खराब है। अखाड़े के सभी सेवादार और अन्य संत इलाहाबाद कुंभ में गए हुए हैं। अखाड़े में कुंभ के लिए भेजी जाने वाली खाद्य सामग्री के अलावा पेशवाई का सामान अखाड़े में रखा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुझे भी अखाड़े में बंधक बना दिया गया। उन्होंने दूसरे पक्ष को राजनीतिक संरक्षण का भी आरोप लगाया। उन्होंने मांग उठाई कि प्रशासन को सख्त रवैया अपनाते हुए अखाड़े के गेट पर बैठे लोगों को तुरंत उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्ति को खुर्द बुर्द नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, महंत सतनाम सिंह, महंत खेमसिंह, महंत अनूप सिंह, संत सुखमन सिंह, संत सोहन सिंह, संत सुखदेव सिंह, संत सिमरनजीत सिंह आदि भी मौजूद रहे।