उत्तराखंड: 600 करोड़ के दवा घोटाले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश, जानिए पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य सूचना आयुक्त ने छह सौ करोड़ के एनआरएचएम दवा घोटाले में शासन को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सूचना आयुक्त ने कहा कि जब तक सीबीआई से जांच की कार्रवाई के लिए केंद्र से अनुमति प्राप्त नहीं होती तब तक स्थानीय स्तर पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।
प्रदेश में वर्ष 2006 से 2010 के बीच करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद में भारी अनियमितता का मामला सामने आया था। आरोप है कि करोड़ों रुपये की दवाओं की आपूर्ति कराए बगैर ही उनका फर्जी भुगतान किया गया।
इसके अलावा रुड़की ड्रगवेयर हाउस में रखे-रखे लाखों रुपये की दवाएं भी एक्सपायर हो गईं। आरटीआई कार्यकर्ता हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा के मुताबिक उन्होंने इस मामले में लोकायुक्त न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।
तत्कालीन लोकायुक्त ने मामले की जांच कराई थी। जांच के बाद मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश हुए, लेकिन आज तक इस मामले में न तो मुकदमा दर्ज हुआ न ही सीबीआई से जांच के लिए कोई पत्राचार किया जा रहा है।
अमर उजाला ने किया था मामले का खुलासा
राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग इस मामले को अपने स्तर से व्यक्तिगत रूप से देखें। जब तक सीबीआई से जांच की कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति प्राप्त नहीं होती है तब तक स्थानीय स्तर पर इस मामले में स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की जानी आवश्यक है। सूचना आयुक्त ने 17 अक्तूबर 2017 को अपर मुख्य सचिव को दिए अपने आदेश में कहा कि सीबीआई की विवेचना की अनुमति की प्रतीक्षा में साक्ष्यों के नष्ट होने या खराब होने की आशंका है।
अमर उजाला ने किया था मामले का खुलासा
एनआरएचएम के दवा घोटाले को अमर उजाला ने उजागर किया था। रुड़की ड्रग वेयर हाउस में रखे-रखे लाखों रुपये की दवाइयों को बेकार कर दिया गया था। केंद्र सरकार की वित्त पोषित योजना की इन दवाओं को मुफ्त में वितरित किया जाना था। लेकिन अधिकारियों ने स्टोर में ही उन्हें एक्सपायर होने दिया। वर्ष 2010 में लाखों की दवाइयों को रुड़की में नाले में फिंकवा दिया गया था।
मामले को दबाव हुए हैं अफसर
आयोग ने हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा की द्वितीय अपील का निस्तारण करते हुए आदेश में इसका विशेष तौर पर उल्लेख किया है कि यह मामला वर्ष 2006 का है और अब वर्ष 2017 चल रहा है इस तरह 11 वर्ष बीत चुके हैं। सीबीआई की विवेचना के लिए केंद्र से अनुमति की प्रतीक्षा में समय निकलने से साक्ष्यों के नष्ट होने, खराब होने की आशंका बनी है। आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक पूर्व में हरीश रावत सरकार में भी मुख्यमंत्री ने मामले में मुकदमा दर्ज कराने की अनुशंसा की थी, लेकिन आला अफसरों ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया।