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Dehradun News: ऑनलाइन लोन का झांसा दे ऑप्टो कंपनी के कर्मचारी को ठगा
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आसानी से ऑनलाइन लोन पाने के चक्कर में ऑप्टो इलेक्ट्राॅनिक्स के एक कर्मचारी साइबर ठगों के झांसे में आ गए। मोबाइल पर गेम खेलते वक्त यह विज्ञापन आया था। साइबर ठगों ने उनसे अलग-अलग बहाने से 4.50 लाख रुपये अपने खातों में जमा करा लिए। इस मामले में साइबर थाने की जांच के बाद रायपुर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार सुरेश कुमार बालियान निवासी गुजरोंवाला, नथुवाआवाला ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स में 33 सालों से काम करते हैं। बीते दिनों वह मोबाइल पर बबल शूटर गेम खेल रहे थे। इसी दौरान एक पॉप-अप (विज्ञापन) बजाज फाइनेंस से लोन लेने संबंधी आया। बालियान को 10 लाख रुपये की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने इस पर दिए गए लिंक को क्लिक कर फॉर्म भर दिया। इसके अगले दिन उनके पास एक युवक का फोन आया।
युवक ने अपना महेंद्र सिंह और खुद को पश्चिम बंगाल का रहने वाला बताया। उसने सारी जानकारी बालियान से हासिल कर ली। इसके बाद उसने अपने अधिकारियों आदित्य सिंह और पंकज भदौरिया नाम के लोगों से बात कराई। इनहोंने कहा कि इस लोन के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी के नाम पर कुछ रुपये चाहिए होंगे। बालियान ने विश्वास करते हुए उनके बताए खाते में पहले एक लाख रुपये जमा करा दिए।
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इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, स्टांप ड्यूटी आदि के नाम पर रुपये जमा कराए गए। कुल 4.50 लाख रुपये जमा करने के बाद जब लोन नहीं मिला तो उन्हें समझ आया कि उनके साथ ठगी हुई है। एसओ रायपुर कुंदन राम ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
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जानकारी के अनुसार सुरेश कुमार बालियान निवासी गुजरोंवाला, नथुवाआवाला ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स में 33 सालों से काम करते हैं। बीते दिनों वह मोबाइल पर बबल शूटर गेम खेल रहे थे। इसी दौरान एक पॉप-अप (विज्ञापन) बजाज फाइनेंस से लोन लेने संबंधी आया। बालियान को 10 लाख रुपये की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने इस पर दिए गए लिंक को क्लिक कर फॉर्म भर दिया। इसके अगले दिन उनके पास एक युवक का फोन आया।
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युवक ने अपना महेंद्र सिंह और खुद को पश्चिम बंगाल का रहने वाला बताया। उसने सारी जानकारी बालियान से हासिल कर ली। इसके बाद उसने अपने अधिकारियों आदित्य सिंह और पंकज भदौरिया नाम के लोगों से बात कराई। इनहोंने कहा कि इस लोन के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी के नाम पर कुछ रुपये चाहिए होंगे। बालियान ने विश्वास करते हुए उनके बताए खाते में पहले एक लाख रुपये जमा करा दिए।
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इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, स्टांप ड्यूटी आदि के नाम पर रुपये जमा कराए गए। कुल 4.50 लाख रुपये जमा करने के बाद जब लोन नहीं मिला तो उन्हें समझ आया कि उनके साथ ठगी हुई है। एसओ रायपुर कुंदन राम ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।