उत्तराखंड मानसून सत्र: महंगाई पर विपक्ष का सदन से वॉकआउट, विधानसभा भवन में ही धरने पर बैठे किशोर
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विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को सदन में महंगाई का मुद्दा खूब गरमाया। विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरने की कोशिश की और बाद में वाकआउट कर दिया। विपक्ष ने पेट्रो पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने, उसका मूल्य कम करने के लिए वैट में कमी जैसे उपायों पर जोर दिया। वहीं, पलटवार में सरकार भी पीछे नहीं रही। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों के साथ सरकार ने विपक्ष के एक-एक आरोप का मजबूती से जवाब दिया।
मंगलवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष महंगाई के मुद्दे को ले आया। नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने नियम 310 के तहत महंगाई के मुद्दे को उठाना चाहा, लेकिन स्पीकर प्रेम चंद्र अग्रवाल ने इसे नियम 58 में सुनने का भरोसा दिलाया। इसके बाद, प्रश्नकाल शुरू हो गया।
भोजन अवकाश के बाद विपक्ष फिर इस मामले को लेकर आया। नेता प्रतिपक्ष के साथ ही प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुुंजवाल, हरीश धामी ने महंगाई पर सरकार की नीतियों की आलोचना की। सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने विपक्ष के जोरदार हमले पर सरकार का मजबूती के साथ पक्ष रखा। लेकिन सरकार के जवाब पर असहमति जताते हुए पूरे विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।
विपक्ष के आरोप
कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपीए सरकार के जमाने की तुलना में इस वक्त 40 फीसदी कम है। इसके बावजूद, पेट्रो पदार्थों की कीमत कम नहीं की जा रही है। कुछ जगहों पर सौ रुपये लीटर तक पेट्रोल की कीमत पहुंच रही है। सरकार को आम आदमी की तकलीफ दिखाई नहीं दे रही है। इसी तरह, खाद्यान्न से लेकर अन्य सारा सामान ऊंचे दामों पर बिक रहा है।
सरकार का जवाब
जिस वक्त एनडीए की सरकार ने सत्ता संभाली, उस वक्त पेट्रोल 74.94 रुपये लीटर और डीजल 61.55 लीटर उसे मिला था। यूपीए के 10 साल के शासन में पेट्रोल 39.51 रुपये लीटर से 74.94 पर पहुंचा। इसी तरह डीजल के दाम में भी उछाल आया है। महंगाई हमें यूपीए के जमाने से मिली है। जहां तक अन्य सामान का सवाल है, उत्तराखंड में मूल्य नियंत्रित हैं।
विपक्ष का जोर
पेट्रो पदार्थों को जीएसटी के दायरे में सरकार लाए, तो 10 से 15 रुपये पेट्रो पदार्थों की कीमत कम हो सकती है। एक्साइज टैक्स कम करके भी कीमत में इतनी ही कमी की जा सकती है। राज्य सरकार वैट कम करके भी इनकी कीमत घटा सकती है।
सरकार की सफाई
केंद्र स्तर पर पेट्रो पदार्थों की कीमतों को लेकर सरकार कवायद कर रही है। जहां तक राज्य सरकार का सवाल है, हम पिछले साल ही तय कर चुके हैं कि डीजल की कीमत में 21 और पेट्रोल की कीमत में 17 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी नहीं होने देंगे।
महंगाई चरम पर है और अच्छे दिन लाने की बात करने वाली डबल इंजन की सरकार इससे बेपरवाह बनी हुई है। आम आदमी को रोटी के लिए तरसना पड़ रहा है।
- डा.इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष।
महंगाई पर सरकार का जवाब संसदीय कार्य मंत्री ने सामने रख दिया है। अब अगर विपक्ष सवालों का जवाब ही नहीं सुनना चाहता तो क्या किया जाए।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री।
विधानसभा भवन में जाने से रोका तो धरने पर बैठे किशोर
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय को विधानसभा भवन में जाने से रोकने पर मंगलवार को खूब हंगामा हुआ। नाराज किशोर भवन के बाहर धरने पर बैठ गए। उनके समर्थन में कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने सुरक्षा कर्मियों कोे जमकर फटकार लगाई। मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इस मुद्दे को उठा दिया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के मनाने के बाद सदन की कार्यवाही आरंभ हुई।
घटनाक्रम के अनुसार, पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय वनाधिकार अधिनियम 2006 को प्रदेश में लागू करने की मांग को लेकर विधानसभा पहुंचे। उनके हाथों में कुछ पर्चे थे, जो वे विधायकों को बांटना चाह रहे थे। उनके हाथों में पर्चे देखकर वहां तैनात पुलिस व विधानसभा के सुरक्षाकर्मी चौकन्ने हो गए। जब किशोर समर्थकों के साथ विधानमंडल भवन में जाने लगे तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस पर उनकी सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस हुई।
नाराज किशोर समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। इस बीच कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन व गोविंद सिंह कुंजवाल वहां पहुंचे तो किशोर को धरने पर बैठा देख हैरान रह गए। उन्हें जब यह पता चला कि किशोर उपाध्याय को विधानमंडल भवन में जाने से रोका गया है तो वे सुरक्षाकर्मियों पर बरस पड़े। विधायक काजी निजामुद्दीन ने सादी वर्दी में मौजूद पुलिस कर्मियों पर सवाल उठाए।
‘मैं पूर्व विधायक हूं। वनाधिकार अधिनियम को लागू करने की मांग कर रहा हूं। ये मेरी मांग नहीं, सभी दलों की मांग है। लेकिन मुझे प्रवेश करने से रोका जा रहा है। ये सही नहीं है। मैं चाहता हूं कि सदन अधिनियम को लागू कर उत्तराखंड के लोगों को वनवासी घोषित कराए।
- किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस।
किशोर उपाध्याय पूर्व विधायक हैं, उन्हें विधानसभा में आने का पूरा अधिकार है। लेकिन उन्हें रोका जाना अनुचित है।
- काजी निजामुद्दीन, कांग्रेस विधायक