केवल पूर्व सैनिकों की भर्ती करेगा उपनल, बाकियों की नो एंट्री
- -सरकार ने बदली उपनल में आउटसोर्सिंग भर्ती की शर्तें
- -वीर नारियों और पूर्व सैनिक आश्रित भी हुए बाहर
- -अब तक हुई सभी नियुक्तियां रहेंगी यथावत
- -केवल दस वर्ष तक पूर्व सैनिक होंगे प्रायोजित
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उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से सरकारी विभागों में केवल पूर्व सैनिकों की भर्ती होगी। सरकार ने निगम की भर्ती प्रक्रिया पर कैंची चलाते हुए गैर पूर्व सैनिकों के साथ वीर नारियों और पूर्व सैनिक आश्रितों को बाहर कर दिया है। बृहस्पतिवार को शासन ने निगम के माध्यम से होने वाली भर्तियों को लेकर नए सिरे से शासनादेश जारी कर दिया।
उपनल में लंबे समय से आउटसोर्सिंग पर होने वाली भर्तियों में सरकार ने पूर्व सैनिकों और आश्रितों को तरजीह देने के साथ गैर पूर्व सैनिकों को शासकीय विभागों, निगमों, संस्थानों और स्थानीय निकायों में नियुक्त करने की व्यवस्था बनाई थी। कांग्रेस सरकार के ही कार्यकाल में इस व्यवस्था को बनाया गया।
इसके बाद वर्ष 2013 में सरकार ने आउटसोर्सिंग की भर्ती पर आरक्षण नियमावली भी प्रभावी कर दी। लेकिन, राष्ट्रपति शासन के दौरान हुई सचिव समिति की बैठक में सचिवों ने उपनल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया। आउटसोर्र्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्त में गैर पूर्व सैनिकों को रखे जाने पर आपत्ति जताई गई। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की कार्यदक्षता, उनका स्थानांतरण नहीं किए जाने जैसी समस्याओं को आधार बनाकर उपनल को केवल पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित किए जाने पर सहमति बनी।
पूर्व सैनिकों के आश्रित और वीर नारियां हुई बाहर
इसी प्रस्ताव को अब सीएम हरीश रावत ने अनुमोदित कर उपनल में गैर पूर्व सैनिकों के साथ पूर्व सैनिक आश्रित और वीर नारियों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया। सचिव समिति की सिफारिश पर उपनल की भर्ती शर्तों में हुए बदलाव ने आश्रितों और वीर नारियों को बाहर कर उनकी अनदेखी कर दी है, जो पूर्व सैनिक श्रेणी का हिस्सा हैं।
हालांकि पूर्व में उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मी जो विभिन्न सरकारी महकमों में काम कर रहे हैं उनकी नियुक्ति को बरकरार रखा गया है। ऐसे में निगम के पास साढ़े सोलह हजार कर्मचारी रहेंगे।
यह है आदेश
-केवल पूर्व सैनिकों को निगम कर सकेगा प्रायोजित
-पूर्व में भर्ती संबंधित तमाम शासनादेश गैरप्रभावी
-पूर्व सैनिक केवल 10 वर्ष के लिए होंगे प्रायोजित
-आरक्षण नियमावली रहेगी पूर्व की भांति प्रभावी