यहां दीवारें सुना रही जलप्रलय की दास्तां
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उत्तराखंड आपदा के सालभर बाद भी ऋषिकेश की दीवारों पर त्रासदी में लापता लोगों के फोटो पोस्टर मौजूद हैं, जो उस भयावहता की दास्तां को याद दिलाते हैं।
जलप्रलय के बाद अपनों की तलाश में तीर्थनगरी आए श्रद्धालुओं के परिजन, नाते रिश्तेदार यहां इस आस में दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर गए थे कि कोई उनके लापता अपनों को कहीं देख ले तो शायद वह कभी घर लौट आएं।
बीते साल आपदा के बाद लापता श्रद्धालुओं के करीबी कई दिनों तक यहां डेरा डाले रहे।
अपनों के लौट आने की आस में वह पहाड़ से लौटते वाहनों के पीछे दौड़ पड़ते और उनके कहीं नजर नहीं आने पर दूसरे वाहनों के आने का इंतजार करते, मगर कम ही लोग ऐसे थे जो यहां से अपनों को पाकर हंसते हुए घर लौटे।
13 लाख लोग कर चुके थे आपदा से पहले यात्रा
केदारनाथ की उस भयावह तबाही को साल बीत गया। बीते वर्ष इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर थी।
अब तक 13 लाख से अधिक यात्री पवित्र धामों के दर्शन कर चुके थे। नगर में यात्रियों की भीड़ और उत्साह देखते ही बनता था, मगर यह उत्साह 16-17 जून की जलप्रलय के बाद मायूसी और हताशा में बदल गया था।
संयुक्त बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, कोतवाली, अस्पताल आदि सार्वजनिक स्थानों पर आज भी आपदा में हताहत हुए लोगों के चस्पा पोस्टर उन दिनों की याद को ताजा कर देते हैं।
कोतवाली में दर्ज की गई 3624 गुमशुदगी
केदारनाथ त्रासदी का अंदाजा बीते वर्ष आपदा के बाद कोतवाली में दर्ज गुमशुदगी रिपोर्टों से लगाया जा सकता है।
अकेले ऋषिकेश कोतवाली के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां 3624 यात्रियों की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। इसमें 1813 पुरुष, 1578 महिलाएं और 233 बच्चे शामिल थे।
इनमें से कितने लोग मिले इसका कोई आंकड़ा पुलिस के पास नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 40-50 लोग ही ऐसे थे, जो सकुशल वापस लौटे। बाकी आज भी लापता हैं।