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प्रलय के बाद से तीर्थस्थल सूने, पर्यटन स्थल खामोश

Mon, 16 Jun 2014 10:23 AM IST
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Mon, 16 Jun 2014 10:23 AM IST
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one year of uttarakhand disaster

बीते वर्ष 16/17 जून की जलप्रलय से जिले में तीर्थाटन और पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से चरमरा गया है।

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सीमित संख्या में पहुंच रहे तीर्थयात्री
एक वर्ष बीत जाने के बाद भी तीर्थयात्री आपदा के खौफ से बाहर नहीं निकल पाए हैं। यही कारण है कि चार धामों में सर्वश्रेष्ठ बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में इस बार सीमित संख्या में ही तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं।

जो तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में पहुंच भी रहे हैं, वे बदरीविशाल के दर्शन कर यात्रा पड़ावों की ओर रूख कर रहे हैं। जिससे धाम में व्यवसाय पटरी पर नहीं लौट पा रहा है।
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धाम के व्यापारियों और तीर्थपुरोहितों ने धीमी तीर्थयात्रा को देखते हुए राज्य सरकार से आर्थिक पैकेज की मांग भी उठाई है।
हेमकुंड साहिब यात्रा पर भी तीर्थयात्रियों का रैला नहीं उमड़ रहा है।

हेमकुंड साहिब तक जाने वाला पैदल मार्ग और प्रवेश द्वार सही हालत में हैं। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए यात्रा पड़ावों पर दुकानें भी सजी हैं, लेकिन तीर्थयात्रियों के मन से आपदा का खौफ बाहर नहीं निकल पा रहा है।
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क्या कहते हैं यात्रा पड़ावों के व्यवसायी

तीर्थयात्रा बेहद कम है। बीते वर्षों तक जहां प्रतिदिन बदरीनाथ धाम में करीब 15 हजार तीर्थयात्री पहुंचते थे। वहीं, आपदा के बाद 15 सौ से पच्चीस सौ तीर्थयात्री ही धाम पहुंच रहे हैं। तीर्थयात्री जल्दी धाम में पहुंच कर जल्दी वापिस जाने का शेड्यूल बनाकर आ रहे हैं। जिससे व्यवसाय पटरी पर नहीं लौट पा रहा है।
- अतुल शाह, सज्जन शाह, पीपलकोटी में होटल व्यवसायी

बीते वर्ष की जलप्रलय के बाद से चार धाम यात्रा के शुरू होने की उम्मीद भी नहीं थी। लेकिन शासन-प्रशासन और बीकेटीसी ने तीर्थयात्रा को पुन: शुरू कराकर यात्रा पड़ावों के व्यवसायियों को भुखमरी से बचा लिया है। आगामी वर्ष से तीर्थयात्रा के पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
- सुनील कुमार, जोशीमठ में लॉज व्यवसायी

क्या हुआ था जलप्रलय के दौरान
बीते वर्ष आई आपदा का बदरीनाथ धाम में कोई असर नहीं हुआ। 16 जून को धाम से करीब 12 किमी पीछे खीरों नदी में आई बाढ़ से अलकनंदा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था।

जिससे लामबगड़ में नदी पर स्थित 400 मेगावाट की विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना के बैराज में पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था।

17 जून की सुबह अचानक खीरों नदी के उद्गम स्थल पर बादल फटने से अलकनंदा नदी में जलप्रलय आ गई। तब जेपी कंपनी के अधिकारियों ने प्रशासन की मदद से 17 जून की सुबह नौ बजे बैराज के सभी गेट खोल दिए।

बदरीनाथ धाम में फंसे थे 13 हजार तीर्थयात्री
और देखते ही देखते लामबगड़ बाजार और लामबगड़ से बैनाकुली तक बदरीनाथ हाईवे पूरी तरह से बह गया था। जिससे बदरीनाथ धाम में करीब 13 हजार तीर्थयात्री फंस गए थे।

चारों और अफरा-तफरी का माहौल था। इसी बीच सुबह दस बजे हेमकुंड साहिब पैदल यात्रा मार्ग पर स्थित पुलना-भ्यूंडार गांव भी लक्ष्मण गंगा में आई जलप्रलय से बह गया।


गांव के 98 परिवारों ने भारी बारिश में गांव के ऊपरी क्षेत्रों के जंगलों में शरण ली। हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वारा गोविंदघाट में अलकनंदा की जलप्रलय से एक हेलीकॉप्टर, 42 खच्चर और करीब 150 वाहन नदी में बह गए थे।

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