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पढ़िए, कैसी है चुनाव में साकेत की दिनचर्या

Sat, 26 Apr 2014 06:25 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 26 Apr 2014 06:25 PM IST
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one day with saket bahuguna

टिहरी लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा चुनावी मैदान में हैं। इसी सीट से बीते लोकसभा उपचुनाव में उन्हें पराजय ही हाथ लगी थी। कहते हैं आन लाइन काम नहीं कर रहा। जनता से सीधे संवाद है।

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कार्यालय में धर्मपाल रावत कार्यक्रम पर पैनी नजर रखे हैं। पत्नी गौरी भी कंधे से कंधा मिलाकर जनसंपर्क में जुटी हैं। साकेत सुबह सात बजे उठते हैं और युवा कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र का फीडबैक लेने के साथ ही दिन के प्रचार को निकल जाते हैं।
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आजकल नींद भी बहुत कम ले पा रहे हैं। तकरीबन 18 घंटे काम कर रहे हैं। कहते हैं नींद तो अब 16 मई के बाद ही। अमर उजाला ने साकेत के प्रचार के तौर तरीकों पर नजर डालने के लिए शुक्रवार का दिन उनके नाम किया।

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दादा के चित्र पर नमन से शुरू होती है सुबह

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सुबह 7.30 बजे
स्नान, पूजन के बाद अपने आवास पर झक सफेद कुर्ते-पाजामे में साकेत सीधे दादा हेमवती नंदन बहुगुणा के चित्र के समक्ष जाते हैं। नतमस्तक होते हैं।

इसके बाद एक हाथ में मिल्क शेक का गिलास थामे दूसरे हाथ को कान पर लगाए मोबाइल से किसी पर बतियाने लगते हैं। बात-चीत से पता चलता है कि दूसरी तरफ कोई कार्यकर्ता है।

सुबह 8.45 बजे
पूर्व मुख्यमंत्री और साकेत बहुगुणा के पिता विजय बहुगुणा नजर आते हैं। कुर्ता-पाजामा, जैकेट पहन तैयार हैं। बहू गौरी भी काले रंग के सूट और बादामी सलवार में कुछ गुफ्तगू करती हैं। एक के बाद एक मीडिया वाले से निपटते कुछ कार्यकर्ताओं के आने का पता चलता है।

कार्यकर्ताओं से लेतें हैं प्रचार का जायजा

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सुबह 9.15 बजे
कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों की तस्वीर बताते नजर आते हैं। हर कोई जीत के प्रति निश्चितता जताता लगता है। कुछ अपनी परेशानी भी बयां करते हैं। नाम ले-लेकर बताते हैं कि कौन, कैसा काम कर रहा है।

तकरीबन आधे घंटे की इस मुलाकात के बाद घंटाघर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा कांप्लेक्स में स्व. बहुगुणा जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण कार्यक्रम में चलने की तैयारी होने लगती है।

सुबह 10.20 बजे
विजय बहुगुणा परिजनों संग काले रंग की होंडा सीवीआर में सवार हो 10 बजकर 20 मिनट पर बजे घंटाघर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा की प्रतिमा पर पहुंचते हैं।

यहां पहले से ही कांग्रेसी नेता अशोक वर्मा, विधायक राजकुमार समेत तकरीबन 15-20 कार्यकर्ता जमा हैं।

मीडियाकर्मियों के इसरार पर ग्रुप फोटो के बाद साकेत एक बार फिर अमर उजाला से रूबरू होते हैं। टिहरी लोकसभा उप-चुनाव में हार के कारणों पर विश्लेषण करते। लगभग 11 बजे विजय बहुगुणा काली कार में निकल जाते हैं, जबकि साकेत को कार्यकर्ता घेर लेते हैं।

प्रचार के वक्त हल्का भोजन है प्राथमिकता

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दोपहर 11.55 बजे
राजपुर रोड पर एमडीडीए कांप्लेक्स गेट पर लगी हरियाणा नंबर की सफेद गाड़ी में साकेत जाने लगते हैं। विवेकानंद खंडूरी समेत कई कार्यकर्ता साथ हैं। कुछ लोग प्रदेश चुनाव प्रभारी राजीव शुक्ला समेत धीरेंद्र प्रताप के भी वहां आने का जिक्र करते हैं, लेकिन साकेत का कार्यक्रम विकासनगर क्षेत्र में प्रचार का है।

दोपहर तकरीबन 1.10 बजे शहरी क्षेत्र का रुख होता है। लगातार प्रचार करना है, इसलिए इस वक्त भी हल्के खाने को प्राथमिकता देते हैं। पानी भी उबालकर पिया जा रहा है।

शाम 5.15 बजे
साकेत की धर्मपत्नी गौरी का कार्यक्रम चुक्खूवाला में कांग्रेस और टिहरी लोकसभा से प्रत्याशी पति का प्रचार करने का है। वह पार्टी ध्वज रंग की टोपी पहने वोट अपील पकड़े कार्यकर्ताओं के साथ निकलती हैं।

राजपुर एससी सीट के विधायक राजकुमार और अन्य कार्यकर्ताओं संग गौरी न केवल वोट बल्कि बुजुर्गों से पति और अपने लिए आशीर्वाद भी मांगती हैं। तकरीबन डेढ़-दो घंटे के इस जनसंपर्क कार्यक्रम में उन्हें महिलाओं का खासा सपोर्ट मिलता है।

जीत का भरोसा, सिलेंडर अबकी इश्यू नहीं

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साकेत बहुगुणा मानते हैं कि टिहरी लोकसभा उप-चुनाव में सिलेंडर की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी से कांग्रेस के खिलाफ हुआ पब्लिक सेंटिमेंट उनकी हार का कारण बना। अमर उजाला से बात-चीत में वह अपनी जीत के प्रति सौ फीसदी आश्वस्त नजर आए।

उनके मुताबिक इस बार सिलेंडर जैसा कोई इश्यू नहीं। वह विकास के नाम पर जनता के बीच जा रहे हैं। पूरी उम्मीद है कि जनता भी एक युवा, भरोसेमंद, विकास के प्रति अग्रसर प्रत्याशी को वोट करेगी।

आग लगने पर खड़ी हो सकती है मुसीबत
साकेत बहुगुणा जिस आवास में रह रहे हैं, उसमें आग लगने पर मुसीबत खड़ी हो सकती है। दरअसल, यहां जो फायर एक्सटिंग्विशर लगा है, उसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी है। वह 28 अप्रैल 2012 थी, यानी लगभग पूरे दो साल बीत चुके हैं। इसे बदला जाना चाहिए था, जो बदला नहीं गया।

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