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सरकारी योजनाओं में सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा कर रहे अधिकारी : मकवाना
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नगर निगम में राज्य सफाई कर्मचारी आयोग उत्तराखंड के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने सफाई कर्मियों की उपेक्षा बंद करने के निर्देश दिए। कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की धामी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सफाई कर्मियों तक पहुंचाया जाए।
मकवाना ने कहा कि मोदी सरकार अगर देश में 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण नहीं कराती तो वाल्मीकि समाज को सिर पर मैला ढोने अथवा हाथ से मैल उठाने जैसी अमानवीय प्रथा से निजात नहीं मिलती। लेकिन, एमएस एक्ट 2013 के अनुसार सीवर, सेप्टिक टैंक और खुले नाले-नालियों की सफाई करने वाले कर्मियों को सर्वेक्षण कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वासन आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकारियों का सहयोग अपेक्षित रूप में नहीं मिल पा रहा है। 2018 में 2256 लोग हाथ से मैला उठाने वाले चयनित हुए, जिनको मोदी सरकार ने 40 हजार रुपये एक मुश्त अनुदान राशि दी। कहा कि यह चिंता का विषय है कि 2018 से अभी तक मात्र नौ सफाई कर्मचारियों को ऋण दिए गए हैं। नगर निगम में अनुबंधित कंपनियों ने सफाई कर्मियों और अन्य कर्मचारियों का ईपीएफ एवं ईएसआई की धनराशि उनके खाते में एक वर्ष से अधिक समय से जमा नहीं कराई और कई माह तक सफाई कर्मियों को वेतन भी नहीं दिया। इन आउटसोर्स कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके अधिकारी सफाई कर्मियों को उनका पैसा उनके खातों में जमा कराएं। सफाईकर्मियों को एसीपी का शीघ्र भुगतान कराएं। बैठक में अपर नगर आयुक्त हेमंत वर्मा, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना, सहायक नगर आयुक्त राजवीर चौहान आदि मौजूद रहे।
मकवाना ने कहा कि मोदी सरकार अगर देश में 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण नहीं कराती तो वाल्मीकि समाज को सिर पर मैला ढोने अथवा हाथ से मैल उठाने जैसी अमानवीय प्रथा से निजात नहीं मिलती। लेकिन, एमएस एक्ट 2013 के अनुसार सीवर, सेप्टिक टैंक और खुले नाले-नालियों की सफाई करने वाले कर्मियों को सर्वेक्षण कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वासन आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकारियों का सहयोग अपेक्षित रूप में नहीं मिल पा रहा है। 2018 में 2256 लोग हाथ से मैला उठाने वाले चयनित हुए, जिनको मोदी सरकार ने 40 हजार रुपये एक मुश्त अनुदान राशि दी। कहा कि यह चिंता का विषय है कि 2018 से अभी तक मात्र नौ सफाई कर्मचारियों को ऋण दिए गए हैं। नगर निगम में अनुबंधित कंपनियों ने सफाई कर्मियों और अन्य कर्मचारियों का ईपीएफ एवं ईएसआई की धनराशि उनके खाते में एक वर्ष से अधिक समय से जमा नहीं कराई और कई माह तक सफाई कर्मियों को वेतन भी नहीं दिया। इन आउटसोर्स कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके अधिकारी सफाई कर्मियों को उनका पैसा उनके खातों में जमा कराएं। सफाईकर्मियों को एसीपी का शीघ्र भुगतान कराएं। बैठक में अपर नगर आयुक्त हेमंत वर्मा, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना, सहायक नगर आयुक्त राजवीर चौहान आदि मौजूद रहे।
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