{"_id":"9d464156ac5a84f4a3a06ef2323c8989","slug":"official-residences-occupied-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड में सरकारी आवासों से हटेंगे कब्जे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड में सरकारी आवासों से हटेंगे कब्जे
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 02 Feb 2016 08:27 AM IST
विज्ञापन
उत्तराखंड में राज्य संपत्ति विभाग के सरकारी आवासों पर लंबे समय से अनाधिकृत रूप से कब्जा जमाए नेताओं, नौकरशाहों या फिर कर्मचारियों के बेदखली की तैयारी कर ली है।
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर संपत्ति विभाग के अफसर ऐसे नेताओं, नौकरशाहों व कर्मचारियों की सूची तैयार करने में जुट गए हैं। कब्जेदारों को चिह्नित करने के लिए भवन निरीक्षकों की टीम लगाई गई जो टिहरी हाउस, यमुना कालोनी, रेसकोर्स, पर्यटन कालोनी, केदारपुरम, लक्ष्मण चौक, सुभाष रोड, कैंट रोड, सर्किट हाउस, कालीदास मार्ग हाथी बड़कला जैसी कालोनियों में सभी आवासों का सर्वे कर रहे हैं।
विज्ञापन
इतना ही नहीं ऐसे सभी कब्जेदारों के खिलाफ सरकार व राज्य संपत्ति विभाग के अफसर केंद्र की तर्ज पर पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। जिसके लिए कार्मिक विभाग की ओर से विहित अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है।
विज्ञापन
राज्य संपत्ति विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो विभाग के पास मंत्री स्तर के 21 बगले, टाइप छह के 15, टाइप पांच के 30 व टाइप चार के 241 आवासों समेत करीब 1155 सरकारी आवास हैं। इनमें तमाम ऐसे आवास हैं जिन पर ऐसे नेता व नौकरशाह काबिज हैं जो इन सरकारी आवासों में रहने के हकदार नहीं है।
निर्धारित प्रावधानों को दरकिनार कर आवासों पर काबिज लोग इन्हें खाली करने को तैयार नहीं हैं। यह स्थिति तब है कि जबकि राज्य संपत्ति विभाग की ओर से कई कब्जेदारों से निर्धारित दर से पांच गुना अधिक धनराशि भी वसूली जा रही है।
कब्जेदार इसलिए आवासों को खाली करने को तैयार नहीं है क्योंकि पांच गुना अधिक किराया देने के बावजूद धनराशि दो हजार रुपये से अधिक नहीं है। जबकि इन सरकारी आवासों का यदि व्यावसायिक दर पर किराए का आकलन किया जाए तो यह 30 हजार से अधिक हैं।