उत्तराखंड CM की 'क्लास' के बाद अफसर पड़ गए बीमार
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मुख्यमंत्री हरीश रावत की रात्रि पाठशाला में जहां सीएम ने अफसरों को विकास कार्यों में तेजी लाने के गुर सिखाए और उन्हें 24 घंटे में से कम से कम 10 घंटे काम करने की आदत डालने की भी नसीहत दी।
सोमवार की रात ढाई बजे तक मुख्यमंत्री ने रुद्रपुर जिले के अधिकारियों को अपनी रात्रि पाठशाला में यूं तो काफी महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। काम को कैसे समय से पूरा किया जाना है, इसकी कुंजी भी सीएम दे गए। आखिर फिर क्या था, मंगलवार से ही जिले के अधिकांश अधिकारी बीमार हो गए।
होते भी क्यों नहीं जब काम करने की आदत ही खत्म हो चुकी है तो फिर बीमार पड़ना तो स्वाभाविक था। मंगलवार को विकास भवन पूरी तरह सुनसान रहा वहीं बुधवार को भी अफसरों की तबीयत काफी नासाज नजर आई। अधिकारी अपने-अपने आवासों पर स्वास्थ्य लाभ का हवाला देते हुए आराम फरमाते रहे।
बुधवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी का दफ्तर भी 12.30 बजे तक सुनसान दिखाई दिया। यही हाल जिला प्रोविजन अधिकारी के कक्ष और जिला कृषि अधिकारी सहित कई अफसरों के केबिन सुनसान दिखाई पड़े। सीएमओ दफ्तर में भी कुछ खास रौनक नहीं दिखी।
सीएम 18 घंटे काम कर सकते हैं तो फिर हम क्यों नहीं
मुख्यमंत्री की रात्रि पाठशाला का इतना बड़ा असर कि अफसरों की हालत ही बिगड़ गई यह हैरानी से कम नहीं है। एक अधिकारी का कहना था कि आजकल कई बीमारियां शरीर में घर कर गई हैं।
शुगर, हाई बीपी सहित कुछ बीमारी आमतौर पर 40 के बाद हर व्यक्ति को घेर रही हैं। यही कारण है कि देर रात्रि तक जगने की आदत अब अधिकारियों में रही नहीं इसलिए हो सकता है ज्यादातर अधिकारी बीमार ही हों। यूं तो विभागों में बीमारी का हवाला देकर अफसर छुट्टी पर गए हैं।
जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि जब मुख्यमंत्री 24 घंटे में से 18-18 घंटे इस उम्र में भी काम कर सकते हैं तो फिर हम लोग क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अफसरों को चाहिए कि कम से कम 24 में 8 घंटे ही ठीक ढंग से काम कर लें तो उसके परिणाम भी बेहतर होंगे और जनता को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा।
डीएम डॉ. पांडेय ने साफ तौर पर कहा कि यह सच है कि सीएम की रात्रि पाठशाला के बाद कई अधिकारी छुट्टी पर हैं, अधिकांश का हवाला बीमारी का ही है। लेकिन अफसरों को अब रात में भी काम करने की आदत डाल लेने चाहिए। इसकी प्रेरणा वह मुख्यमंत्री के देर रात तक कार्य करने से लें।