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खराब पौधे बेचने वाले नर्सरी संचालकों की खैर नहीं

भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 May 2017 12:48 PM IST
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nursery - फोटो : amar ujala
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नर्सरी संचालक अच्छी क्वालिटी के फलदार पौधों का दावा कर किसानों के साथ छल नहीं कर सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार जल्द ही नर्सरी एक्ट को कैबिनेट में मंजूरी देगी। राज्य गठन के बाद उद्यान विभाग ने पहली बार नर्सरी एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया है।
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यदि कोई नर्सरी संचालक निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों को खराब पौधे सप्लाई करता है तो सरकार उसके खिलाफ दंडनीय कार्रवाई करेगी। यहां तक की उसे छह माह की कैद व 50 हजार रुपये तक जुर्माना भी हो सकता है। 


अभी तक प्रदेश में उत्तर प्रदेश का ही नर्सरी एक्ट लागू है। लेकिन उत्तराखंड के लिहाज से इस एक्ट में संशोधन कर नए सिरे से ड्राफ्ट बनाया गया है। इस एक्ट में फलदार पौधों की क्वालिटी, नर्सरी नियमावली और सजा का प्रावधान आदि शामिल किए गए।  हर साल किसान नए पौधे लगाते हैं और नर्सरियों से पौधे खरीदते हैं।

अगर किसानों को अच्छी गुणवत्ता के पौधे ही नहीं मिलेंगे तो पैदावार भी नहीं बढ़ेगी। जिसे देखते हुए उद्यान विभाग ने उत्तराखंड राज्य का अपना नर्सरी एक्ट तैयार कर शासन को भेजा है। राज्य में इस समय 171 निजी और 58 सरकारी क्षेत्र की नर्सरी हैं। इन नर्सरियों में आम, लीची, अमरूद, अनार, सेब, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, पलम, नींबू, माल्टा, गलगल आदि फलों के पौधे तैयार कर किसानों को बेचे जाते हैं। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार किसानों के साथ छलावा नहीं होने देगी। नर्सरी एक्ट को कैबिनेट में रखकर मंजूरी दी जाएगी। अगर कोई नर्सरी संचालक किसानों को खराब पौधे उपलब्ध कराता है तो उसके खिलाफ दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। जब तक किसानों को क्वालिटी के पौधे नहीं मिलेंगे, तब तक न तो पैदावार बढ़ेगी और न ही किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। 
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