फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Number of child labour may increase due to Covid pandemic

चिंताजनक : कोविड महामारी की वजह से बढ़ सकती है बाल श्रमिकों की संख्या, पढ़िए क्या कहती है रिपोर्ट 

Fri, 25 Mar 2022 01:12 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 25 Mar 2022 01:12 PM IST
सार

यूनिसेफ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ओर से पिछले साल एक रिपोर्ट जारी की गई है। जिसके मुताबिक कोविड महामारी की वजह से बड़ी संख्या में बच्चे बाल श्रम में फंस सकते हैं। बाल आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल संरक्षण को लेकर सही से कार्य की जरूरत है।

विज्ञापन
Number of child labour may increase due to Covid pandemic
child labour - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बाल श्रम को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कैंपेन अगेनेस्ट चाइल्ड लेबर (सीएसीएल) के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में कोविड महामारी की वजह से बाल श्रमिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई। बैठक में कहा गया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल देश में 89 लाख बच्चे बाल श्रम में फंस जाएंगे। जबकि विश्व में इस तरह के बच्चों की संख्या 20 करोड़ से अधिक पहुंच सकती है।

विज्ञापन


उत्तराखंड बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बताया गया कि यूनिसेफ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ओर से पिछले साल एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कोविड महामारी की वजह से बड़ी संख्या में बच्चे बाल श्रम में फंस सकते हैं। बाल आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल संरक्षण को लेकर सही से कार्य की जरूरत है।
विज्ञापन


बैठक में बताया गया कि कोरोना के बाद परिस्थिति बदल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे कृषि कार्यों में लगे हैं। वहीं कस्बों और बाजारों में भी बच्चे पारिवारिक व्यवसायों में कार्य कर रहे हैं। परिस्थितियों की वजह से देश में बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ रही है। यदि किसी सरकारी का गैर सरकारी संगठन के प्रयासों से किसी बाल श्रमिक को मुक्त कराया जाता है, तो उसके पुनर्वास, शिक्षा परिवार की आजीविका के संबंध में किसी भी तरह की व्यवस्थाएं देखने को नहीं मिलती।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें... रुड़की: सूटकेस में युवती का शव लेकर जा रहा था प्रेमी, पकड़े जाने पर मचा हड़कंप, पूछताछ में बोला, लोगों के तंज से हो चुके थे परेशान

उत्तराखंड में सभी जिलों में टास्क फोर्स गठन एवं इसके क्रियान्वयन के संबंध में बाल श्रम के खिलाफ अभियान चला रहे संगठन की ओर से बताया गया कि जिला स्तर पर टास्क फोर्स तो बनी है, लेकिन श्रम निरीक्षकों की कमी है। अधिकतर जिलों में इनके पद खाली हैं। बाल आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इस मसले पर जल्द श्रम विभाग के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।


बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि बाल श्रमिक व कामगार बच्चों में अधिकतर बच्चे ऐसे हैं जिनका स्कूल में नामांकन है, लेकिन नामांकन के बावजूद यह बच्चे स्कूल नहीं जाते। बताया गया कि उत्तराखंड में कुल बच्चों में से 6.8 प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर थे। बाल आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में शिक्षा विभाग से सर्वे करवाया जाएगा। बैठक में की सीएसीएल राज्य समन्वयक नीलिमा भट्ट, बाल आयोग के सदस्य विनोद कपरुवाण, रघु तिवारी, रश्मि पैन्यूली आदि मौजूद रहे। 

सरकार से लिया जाएगा सहयोग : गुलाटी 
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से मिलकर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बाल श्रम पर रोक के लिए आयोग की ओर से सरकार का सहयोग लिया जाएगा। बाल संरक्षण आयोग के सदस्य विनोद कपरुवाण ने कहा कि बाल श्रम को लेकर हुई बैठक में यह बात सामने आई है कि कोविड की वजह से बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ सकती है जो चिंताजनक है। आयोग की ओर से बाल श्रम के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

बाल श्रमिकों, बाल मजदूरी, यूनिसेफ, बाल संरक्षण, कोरोना वायरस, कोविड महामारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed