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Coronavirus in Uttarakhand : अब प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी घर की बनी रोटी, वैज्ञानिकों ने विकसित की प्रजाति

Sat, 01 Aug 2020 09:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुरेंद्र कुमार वर्मा, अमर उजाला, पंतनगर
सुरेंद्र कुमार वर्मा, अमर उजाला, पंतनगर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 01 Aug 2020 09:50 PM IST
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Now homemade bread will increase immunity, scientists have developed the species

भोज्य पदार्थों में मुख्य रूप से जिंक और आयरन की कमी कुपोषण का मुख्य कारण है। जिंक की कमी से जहां शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, वहीं लौह तत्व की कमी से एनीमिया जैसी बीमारियों को निमंत्रण मिलता है।

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पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आम गेहूं के मुकाबले 65 फीसद अधिक जस्ते और आयरन युक्त गेहूं की प्रजाति विकसित करने में सफलता हासिल की है। दावा है कि इस गेहूं के आटे की बनी रोटी खाने से लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत बनेगा, जो कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचाव में सहायक साबित होगा।
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राज्य प्रजाति विमोचन समिति ने पंतनगर विवि से विकसित गेहूं की यूपी-2903 प्रजाति का हाल में विमोचन किया था। यह प्रजाति उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्रों में (नवंबर में) बुवाई के लिए उपयुक्त है। इस प्रजाति की औसत उत्पादकता 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और उपज क्षमता 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पाई गई है। इस प्रजाति में प्रोटीन की मात्रा जहां 12.68 प्रतिशत पाई गई है, वहीं इसमें जस्ते और लौह तत्व की मात्रा लगभग 65 प्रतिशत अधिक है।

यह प्राय: सामान्य प्रजातियों में नहीं पाई जाती है। राष्ट्रीय परीक्षणों में जहां इसमें जस्ते की मात्रा 49 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) से अधिक पाई गई है, वहीं इस प्रजाति में लौह तत्व की मात्रा 47 पीपीएम तक पाई गई है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में विशेष योगदान

गेहूं की यूपी-2903 प्रजाति विकसित करने वाले पंतनगर विवि के प्राध्यापक एवं वरिष्ठ गेहूं प्रजनक डॉ. जेपी जायसवाल ने बताया कि हमारी टीम (गेहूं प्रजनक डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. स्वाति) का प्रयास है कि भविष्य में जो भी किस्में विकसित हों, वह उच्च उत्पादन क्षमता के साथ रोग एवं कीटों के प्रति अवरोधी होने सहित प्रोटीन, जस्ता और लौह तत्व की प्रचुर मात्रा से युक्त हों।

गेहूं हमारे देश की अधिकांश जनसंख्या का मूल भोजन है और गेहूं के आटे का प्रयोग रोटी, ब्रेड, बिस्कुट, के साथ विभिन्न प्रकार के फास्ट फूड तैयार करने मे किया जाता है। इसलिए यूपी-2903 जैसी किस्मों का कुपोषण मिटाने मे पर्याप्त योगदान रहेगा। गेहूं की इस प्रकार की किस्मों के विकास में अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं उन्नयन केंद्र (सीमिट), मैक्सिको से आयातित जनन द्रव्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

यूपी-2903 जैसी किस्मों का इम्यूनिटी बढ़ाने में विशेष योगदान हो सकता है। यूपी-2903 जैसी किस्मों के बीज का उत्पादन प्रचुर मात्रा में हो सके इसकी व्यवस्था की जाएगी। जिससे इसका बीज अधिक से अधिक किसानों के बीच पहुंच सके। निजी कंपनियो से भी इसके बीज उत्पादन का करार किया जा सकता है।
- डॉ. अजित सिंह नैन, निदेशक शोध- पंतनगर विवि
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