फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Now government land cannot be given at lower price

अमर उजाला एक्सक्लूसिव: अब औने पौने दामों में नहीं दी जा सकेगी सरकारी जमीन

Thu, 03 Oct 2019 02:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 03 Oct 2019 02:30 PM IST
सार

  • राजस्व विभाग तैयार कर रहा नई नीति, जमीन आवंटन प्रक्रिया होगी पारदर्शी 
  • डीएम की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी को मिलेगा अधिकार 

विज्ञापन
Now government land cannot be given at lower price
डेमो - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तराखंड में सरकार अब जिसे चाहे, उसे सरकारी जमीन नहीं दे पाएगी। सरकारी जमीन के आवंटन के लिए नई नीति बनाई जा रही है। इस नई नीति में सरकारी जमीन आवंटन की नई  व्यवस्था होगी और इस व्यवस्था में सरकार के खुद के हाथ भी बंधे होंगे। नए प्रावधानों में हर जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित होगी। इस समिति द्वारा कड़े मानकों की जांच परख के बाद ही जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। 

विज्ञापन


सरकारी जमीनों के आवंटन की व्यवस्था इस समय गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत की जा रही है। इसके तहत सरकार अपने विवेक का उपयोग करते हुए किसी को भी सरकारी जमीन दे सकती है। इसी का फायदा उठाकर प्रदेश में लंबे समय से सरकारी जमीनों को बेहद कम दामों पर निजी व्यक्तियों और संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाता रहा है। अब नई व्यवस्था के तहत इस पर रोक लगाने की तैयारी है।
विज्ञापन


सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ सरकार को सरकारी जमीन के आवंटन के समय सूचना सार्वजनिक करनी होगी, बल्कि सबको समान रूप से अवसर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था करनी होगी। इस व्यवस्था में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का भी प्रस्ताव है। यह कमेटी ही जमीन का आवंटन करेगी और आवंटन की प्रक्रिया का संचालन करेेगी। शासन के सूत्रों के मुताबिक इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस प्रस्ताव पर न्याय विभाग से राय ली गई है। न्याय ने भी कहा है कि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट में इस नई व्यवस्था को शामिल किया जा सकता है। न्याय विभाग ने यहां तक कहा है कि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत इसका शासनादेश भी जारी किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

क्यों पड़ी जरूरत?

दरअसल सरकार को हाईकोर्ट के सख्त रुख के कारण अपने हाथ बांधने के लिए विवश होना पड़ रहा है। सुरेंद्र सिंह नेगी की याचिका पर 19 जून 2018 के आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को कहा था कि सरकारी जमीन पर राज्य के प्रत्येक नागरिक का हक है। सरकार अपनी मर्जी से बिना सार्वजनिक सूचना के सरकारी जमीन का आवंटन नहीं कर सकती।

न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया था कि सरकारी जमीन किसी भी व्यक्ति को बिना प्रक्रिया का पालन करे न दी जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, चंडीगढ़ एवं अन्य बनाम नीरज शर्मा के मामले में यह स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थाओं तक को सरकारी संपत्ति प्रीमियम आधार पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। 

सरकारी भूमि आवंटन के लिए नीति बनाई जा रही है। अभी मैं इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। यह तय होना अभी बाकी है कि इसे कैबिनेट में लाया जाएगा या इसका शासनादेश किया जाएगा।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व  

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें... https://www.facebook.com/AuNewsDehradun/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed