अमर उजाला एक्सक्लूसिव: अब औने पौने दामों में नहीं दी जा सकेगी सरकारी जमीन
- राजस्व विभाग तैयार कर रहा नई नीति, जमीन आवंटन प्रक्रिया होगी पारदर्शी
- डीएम की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी को मिलेगा अधिकार
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उत्तराखंड में सरकार अब जिसे चाहे, उसे सरकारी जमीन नहीं दे पाएगी। सरकारी जमीन के आवंटन के लिए नई नीति बनाई जा रही है। इस नई नीति में सरकारी जमीन आवंटन की नई व्यवस्था होगी और इस व्यवस्था में सरकार के खुद के हाथ भी बंधे होंगे। नए प्रावधानों में हर जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित होगी। इस समिति द्वारा कड़े मानकों की जांच परख के बाद ही जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
सरकारी जमीनों के आवंटन की व्यवस्था इस समय गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत की जा रही है। इसके तहत सरकार अपने विवेक का उपयोग करते हुए किसी को भी सरकारी जमीन दे सकती है। इसी का फायदा उठाकर प्रदेश में लंबे समय से सरकारी जमीनों को बेहद कम दामों पर निजी व्यक्तियों और संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाता रहा है। अब नई व्यवस्था के तहत इस पर रोक लगाने की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ सरकार को सरकारी जमीन के आवंटन के समय सूचना सार्वजनिक करनी होगी, बल्कि सबको समान रूप से अवसर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था करनी होगी। इस व्यवस्था में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का भी प्रस्ताव है। यह कमेटी ही जमीन का आवंटन करेगी और आवंटन की प्रक्रिया का संचालन करेेगी। शासन के सूत्रों के मुताबिक इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस प्रस्ताव पर न्याय विभाग से राय ली गई है। न्याय ने भी कहा है कि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट में इस नई व्यवस्था को शामिल किया जा सकता है। न्याय विभाग ने यहां तक कहा है कि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत इसका शासनादेश भी जारी किया जा सकता है।
क्यों पड़ी जरूरत?
दरअसल सरकार को हाईकोर्ट के सख्त रुख के कारण अपने हाथ बांधने के लिए विवश होना पड़ रहा है। सुरेंद्र सिंह नेगी की याचिका पर 19 जून 2018 के आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को कहा था कि सरकारी जमीन पर राज्य के प्रत्येक नागरिक का हक है। सरकार अपनी मर्जी से बिना सार्वजनिक सूचना के सरकारी जमीन का आवंटन नहीं कर सकती।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया था कि सरकारी जमीन किसी भी व्यक्ति को बिना प्रक्रिया का पालन करे न दी जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, चंडीगढ़ एवं अन्य बनाम नीरज शर्मा के मामले में यह स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थाओं तक को सरकारी संपत्ति प्रीमियम आधार पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
सरकारी भूमि आवंटन के लिए नीति बनाई जा रही है। अभी मैं इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। यह तय होना अभी बाकी है कि इसे कैबिनेट में लाया जाएगा या इसका शासनादेश किया जाएगा।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व
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