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आखिर कहां गया लड़कों का 'खून'
देहरादून/रजा शास्त्री
Updated Sat, 17 Aug 2013 12:21 AM IST
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लडकियों को उचित खानपान के अभाव में खून की कमी हो रही है तो लड़के भी इस श्रेणी में शामिल हैं। उत्तराखंड में बेटियां ही नहीं बेटे भी एनीमिक हैं। इनकी सेहत पर भी बेटियों की तरह ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के एक साल के सर्वेक्षण के नतीजे देखकर अभियान की रणनीति में बदलाव किया गया है। अभी तक सर्वेक्षण बेटियों पर ही किया जा रहा था लेकिन अब बेटों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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कुपोषण और एनीमिया सर्वे
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कुपोषण और एनीमिया को लेकर लकड़ों और लड़कियों पर संयुक्त सर्वे की शुरुआत अगले महीने सितंबर से होगी। धीरे-धीरे इसमें उत्तराखंड के सभी जिलों को शामिल कर लिया जाएगा।
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अभियान की कंसल्टेंट डा सुजाता सिन्हा ने बताया कि यह सर्वे अभी तक दून में हो रहा था, लेकिन अब इसमें हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर को भी शामिल कर लिया गया है। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है।
हेमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम
कार्यक्रम के तहत पिछले साल सिंतबर से अब तक हुए सर्वे में पांच हजार लड़कियों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें अधिकांश लड़कियां एनीमिक निकली थीं।
इसी सर्वे में चौंकानेवाला तथ्य पता चला कि लड़कों की भी स्थिति बिगड़ रही है। उनका हेमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम पाया गया। भारतीय बालरोग अकादमी उत्तराखंड के अध्यक्ष डा डीएस रावत ने बताया कि अस्पताल आने वाले पचास फीसदी बच्चे एनीमिक होते हैं। सर्वे के बाद स्थिति सुधारने के लिए गाइडलाइन तैयार की जाएगी।
एनीमिया का कारण
.पौष्टिक आहार न लेना
.बच्चों के पेट में कीड़े
.हरी सब्जियों का घटता सेवन
.आयरन सप्लीमेंट न लेना