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औली में असली बर्फ पड़ नहीं रही, नकली टिक नहीं रही, संकट में गेम्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 06 Feb 2018 02:40 PM IST
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उत्तराखंड के 'स्विट्जरलैंड' औली में बर्फबारी न होने से विंटर गेम्स खटाई में पड़ते नजर आ रहे हैं। मेजबान पर्यटन विभाग की कृतिम(नकली) बर्फ बनाने की कोशिशें भी रंग नहीं ला पा रही हैं। जो बर्फ बन रही है, वो हाई टेंपरेचर में टिक नहीं रही। तापमान अनुकूल न हुआ तो एक बार फिर प्रतियोगिता स्थगित करनी पड़ सकती है। अब सारा दारोमदार 'इंद्रदेव' पर है। मौसम विभाग ने बर्फबारी का पूर्वानुमान घोषित किया है।
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विंटर गेम्स का आयोजन पिछले महीने होना था। लेकिन पर्याप्त बर्फबारी न होने की वजह से इसे टालना पड़ा। पर्यटन विभाग कृतिम बर्फ से माहौल बनाने का प्रयास तो कर रहा है, मगर ये सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं।
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कार्यक्रम के अनुसार, औली में 16 फरवरी से स्कीइंग का आयोजन होना है। बहरहाल, विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की टीम औली पहुंच गई है, जो सारी स्थितियों का आंकलन करने के बाद इस आयोजन के संबंध में फैसला लेगी। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, औली में बर्फ बनाई जा रही है, लेकिन वह दिन तक टिक नहीं पा रही है। मौसम विभाग ने बर्फबारी का पूर्वानुमान घोषित किया है। इस पर सबकी नजरें हैं।
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हो चुके साउथ एशियन विंटर गेम्स
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उत्तराखंड राज्य वर्ष 2011 के दौरान औली में साउथ एशियन विंटर गेम्स की मेजबानी कर चुका है। इस प्रतियोगिता के आयोजन के चलते देहरादून और औली में शीतकालीन खेलों के आयोजन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था।
आकर्षक सैरगाह भी है औली
प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में औली अनूठी है। इसी कारण इसे आकर्षक सैरगाह भी माना जाता है। बड़ी संख्या पर्यटक औली जाते हैं और वहां दूर तक फैले बुग्यालों यानी हरे घास के मैदानों के दीदार कर सुकून महसूस करते हैं। करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली में एक कृतिम झील भी बनाई गई है।
हनुमान ने भी किया था औली में विश्राम
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब लक्ष्मण की मूर्छा तोड़ने के लिए हनुमान कैलाश पर्वत पर आए थे, तब उन्होंने औली में विश्राम किया था। औली में बजरंग बली का एक मंदिर भी है।