इस बार कांवड़ यात्रा राम भरोसे, यहां सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं!
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कांवड़ यात्रा में आने वाले कांवड़िए इस बार अपने भरोसे ही आएं, क्योंकि यहां आपकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। श्रावण यात्रा में नीलकंठ धाम के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है।
वर्षाकाल में कई दृष्टि से संवेदनशील इस यात्रा में आने वाले शिवभक्तों की सुरक्षा को लेकर सरकार की कोई तैयारियां धरातल पर नहीं हैं। उत्तराखंड में वर्ष 2013 में आई जल प्रलय के बाद से चारधाम और हेमकुंड धाम की यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं का अनिवार्य फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
ऐसी ही व्यवस्था श्रावण मास की नीलकंठ कांवड़ यात्रा में लागू करने की दरकार है, लेकिन चार साल बाद भी फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने में जिम्मेदार हीलाहवाली कर रहे हैं।
जून-2013 में उत्तराखंड आपदा के बाद में देश-दुनिया के हजारों श्रद्धालु विभिन्न धामों व यात्रा मार्गों में हताहत हो गए थे। पंजीकरण व्यवस्था के अभाव में राज्य सरकार या प्रशासन इनका सही आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सकी।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
लिहाजा वर्ष 2014 से चारधाम और हेमकुंड यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन करने का निर्णय लिया गया। इसके इतर श्रावण मास की नीलकंठ कांवड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं का मैनुअली पंजीकरण किया जा रहा है।
इसकी जिम्मेदारी पौड़ी जिला प्रशासन ने जिला पंचायत को सौंपी है। यह पंजीकरण नि:शुल्क है, लेकिन अनिवार्य नहीं। नतीजतन यात्रा में आने वाले अधिकांश कांवड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
नीलकंठ के क्षेत्र पंचायत सदस्य धन सिंह राणा, सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, देवेंद्र पयाल आदि का कहना है कि सरकार श्रावण यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कतई गंभीर नहीं है। इस यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं। जिन्हें जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती है। बावजूद इसके आजतक फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन न होना लापरवाही है।