राधे मां और सच्चिदानंद के कारण संतों को बड़ा 'नुकसान'
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जुलाई माह से शुरू हुए नासिक कुंभ में 25 संतों को महामंडलेश्वर बनाया जाना था लेकिन राधे मां और सच्चिदानंद प्रकरण उछलने पर अखाड़ा परिषद ने इस कुंभ में किसी भी संत को महामंडलेश्वर की पदवी देने पर विराम लगा दिया है।
गौरतलब है कि चार कुंभ नगरों में कुंभ से ठीक पहले वरिष्ठ संतों को महामंडलेश्वर पदों पर आसीन किया जाता है। यह महामंडलेश्वर शाही स्नानों की शोभा बनते हैं। कुंभ से ठीक पहले नोएडा के चर्चित कारोबारी सचिन दत्त को महामंडलेश्वर सच्चिदानंद बना दिया।
इसका भारी असर देश भर में पड़ा है। इसी दौरान जूना अखाड़े की निलंबित महामंडलेश्वर राधे मां का प्रकरण उछल गया। इसे देखते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास ने इस कुंभ में किसी को भी महामंडलेश्वर बनाने पर रोक लगा दी है।
कोर्ट, कचहरी, पुलिस थाने से जूझ रहीं राधे मां
परिणामस्वरूप कुंभ प्रारंभ हो चुका है, लेकिन किसी भी अखाड़े में महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह नहीं हुए हैं। दोनों प्रकरणों में कई दिग्गज संतों की किरकिरी के बाद नरेंद्र गिरि की अध्यक्षता वाली अखाड़ा परिषद ने भी कोई महामंडलेश्वर नहीं बनने दिया।
सच्चिदानंद को अपमानित होकर पद छोड़ना पड़ा और राधे मां कोर्ट, कचहरी, पुलिस थाने से जूझ रही हैं। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास के अनुसार नासिक में तो कोई महामंडलेश्वर नहीं बनेगा।
रही बात अगले कुंभ उज्जैन की, संतों को जांचकर यह पदवी दी जाएगी। जिन संतों के कारण समूचे संत जगत को हाल ही में अपमानित होना पड़ा, उनके विरुद्ध भी परिषद कार्रवाई करेगी।