उत्तराखंड: अब राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को फजीहत का डर
- दोनों निर्दलीय अड़े, भाजपा असमंजस में
- कांग्रेसी प्रत्याशी को टक्कर देना दूर, अपने विधायकों को भी एकजुट नहीं रख पाएंगी भाजपा
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राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा के सामने बड़ा असमंजस खड़ा हो गया है कि वह किस निर्दलीय का समर्थन करे। पार्टी समर्थित दोनों निर्दलीय प्रत्याशी पूरी उम्मीदों के साथ मैदान में डटे हुए हैं। न गीता ठाकुर ने पर्चा वापस लिया और न अनिल गोयल ने।
अब भाजपा के रणनीतिकार दोनों के बीच समझौता कराने में जुट गए हैं ताकि वोट बंटने से रोका जा सके। यदि ऐसा न हो पाया तो कांग्रेस प्रत्याशी को टक्कर देना तो दूर भाजपा को अपने विधायकों के वोट एकजुट रख पाना भी बड़ा मुश्किल हो जाएगा।
रणनीतिकारों ने बताया कि गीता ठाकुर, अनिल गोयल से आपस में बैठकर एक नाम तय करने के लिए कहा जाएगा। लेकिन, दोनों निर्दलीय प्रत्याशी कह रहे हैं अगर लड़ना नहीं होता तो शुक्रवार को पर्चा वापस ले लेते। गीता ठाकुर का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि महिला होने के नाते भाजपा उनके साथ ही खड़ी होगी। यह पूछे जाने पर कि सिर्फ भाजपा के वोटों से ही जीत तय नहीं होगी, वह कहती हैं कि उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा है।
अनिल ने भी भरा दम
अनिल गोयल भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। कह रहे हैं कि यहां तो तीन ही मैदान में हैं, कई बार तो एक सीट के लिए कई-कई प्रत्याशी होते हैं। मुझे भाजपा के साथ-साथ अन्य दलों के नेक विधायकों पर पूरा भरोसा है। मैं सभी 61 विधायकों से उत्तराखंड की अस्मिता के नाम वोट मांगूंगा। दोनों के अड़ने से भाजपा तय नहीं कर पा रही है कि अब किसका समर्थन करे। इस हालात से कांग्रेसी खेमे में खुशी है कि दोनों प्रत्याशी जितना भिड़ेंगे, कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा को उतना ही फायदा होगा।
भाजपा चोर दरवाजे से जीतना चाह रही रास सीट
मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रवक्ता एवं मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट कांग्रेस में असंतोष होने की बात कह रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नौ बागियों के आने से भाजपा के अंदर आक्रोश है।
कहा कि भाजपा ने पहले चोर दरवाजे से सरकार बनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अब वह चोर दरवाजे से राज्यसभा सीट का चुनाव जीतना चाहती है, इसमें भी वह सफल नहीं हो पाएगी। कहा कि भाजपा को सीबीआई से कुछ ज्यादा ही प्रेम है।
कल तक विभिन्न घोटालों के आरोप लगाकर जिनके खिलाफ जांच कराने की मांग करती थी, अब उनको पार्टी में शामिल कर लिया। उसे साहस कर भाजपा कार्यालय से 27 लाख गायब होने से लेकर उनकी सरकार के दौरान हुए घोटालों की जांच कराने के लिए मांग करनी चाहिए।